Kawardha Road Collapse: कवर्धा सड़क धंसने का मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करीब 2.50 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क पहली ही बारिश में धंस गई। मामला सामने आते ही शासन ने सख्त रुख अपनाया और दो इंजीनियरों को तत्काल निलंबित कर दिया। वहीं कार्यपालन अभियंता (EE) के निलंबन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। सड़क बनाने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
कवर्धा सड़क धंसने का मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह सड़क मार्च 2026 में ही बनकर तैयार हुई थी। यानी निर्माण पूरा होने के महज चार महीने बाद ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए। बोड़ला ब्लॉक में बनी इस सड़क पर 8 जुलाई को पुलिया के पास एक हाईवा फंस गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने सड़क की परत हाथों से उखाड़कर वीडियो बना लिया।
वीडियो वायरल होते ही पहुंची जांच टीम
कवर्धा सड़क धंसने का मामला सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद और भी गंभीर हो गया। वीडियो सामने आने के बाद राज्य स्तर की जांच टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण के दौरान सड़क निर्माण में कई तकनीकी कमियां और गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
दो इंजीनियर निलंबित, EE पर भी कार्रवाई की तैयारी
कवर्धा सड़क धंसने का मामला की जांच के बाद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सहायक अभियंता (AE) सौरभ देशमुख और उप अभियंता (JE) जे. रितेश नायडू को तत्काल निलंबित कर दिया गया। वहीं कार्यपालन अभियंता (EE) संतोष कुमार ठाकुर के निलंबन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्य की निगरानी में गंभीर लापरवाही हुई।
Read more: CG Jobs: 10वीं पास हैं? दुर्ग में खुल रही 1000 से ज्यादा नौकरियों की राह, ऐसे करें आवेदन
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू
कवर्धा सड़क धंसने का मामला में केवल अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि निर्माण एजेंसी पर भी कार्रवाई की जा रही है। सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार तिलक चंद्रवंशी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो भविष्य में उन्हें सरकारी निर्माण कार्यों से बाहर किया जा सकता है।
क्या है प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना?
कवर्धा सड़क धंसने का मामला के बाद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भी चर्चा में आ गई है। यह योजना 25 दिसंबर 2000 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के गांवों को हर मौसम में उपयोग योग्य पक्की सड़कों से जोड़ना है। इस योजना के तहत बनने वाली सड़कों में गुणवत्ता और टिकाऊपन को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।
गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल
कवर्धा सड़क धंसने का मामला ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क कुछ ही महीनों में खराब हो जाए तो इससे सरकारी धन की बर्बादी के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। अब लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद और हो सकती है कार्रवाई
कवर्धा सड़क धंसने का मामला फिलहाल जांच के दायरे में है। यदि विस्तृत जांच में और गड़बड़ियां सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदार और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घटिया निर्माण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







