Monday, August 24, 2026
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MP Property Rights: MP के 48 लाख परिवारों को मिलेगा जमीन का वैध मालिकाना हक, तहसीलदार-नायब तहसीलदार भी कर सकेंगे रजिस्ट्री

MP Property Rights: भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से आबादी की भूमि पर निवास कर रहे लाखों परिवारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ लागू करते हुए करीब 48 लाख परिवारों को उनकी जमीन का वैध मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों की जमीन की रजिस्ट्री अब स्थानीय स्तर पर आसान होगी, क्योंकि तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी सब-रजिस्ट्रार की शक्तियां प्रदान की गई हैं।

तहसील स्तर पर ही होगी रजिस्ट्री

नई व्यवस्था के तहत अब लाभार्थियों को जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए केवल उप पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। तहसील स्तर पर पदस्थ राजस्व अधिकारी भी स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाली भूमि का पंजीयन कर सकेंगे। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है। प्रदेश में पहले से कार्यरत 235 सब-रजिस्ट्रार के साथ अब राजस्व अधिकारी भी यह जिम्मेदारी निभाएंगे।

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स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ

MP Property Rights: राज्य सरकार ने योजना के तहत लाभार्थियों से स्टाम्प ड्यूटी, पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर नहीं लेने का निर्णय लिया है। इन सभी शुल्कों की भरपाई राज्य सरकार स्वयं करेगी। सरकार के इस फैसले से लोगों पर आर्थिक बोझ कम होगा और अधिक से अधिक पात्र परिवार अपनी संपत्ति का वैध पंजीयन करा सकेंगे।

सरकार पर आएगा 3,800 करोड़ रुपये का भार

MP Property Rights: योजना को लागू करने से राज्य सरकार पर लगभग 3,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी।

बैंक से ऋण लेना होगा आसान

योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पंजीकृत स्वामित्व अधिकार मिलने के बाद लाभार्थी अपनी जमीन के आधार पर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। इससे वे मकान निर्माण, कृषि विस्तार, स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्यों के लिए वित्तीय सहायता हासिल कर सकेंगे।

निगरानी के लिए बनेगी उच्चस्तरीय समिति

MP Property Rights: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति में पंजीयन, कोष एवं लेखा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी।

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प्रचार-प्रसार के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर

MP Property Rights: राज्य सरकार ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता अभियान और आवश्यक मुद्रण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। वहीं, योजना से जुड़े दिशा-निर्देश जारी करने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को सौंपी गई है।सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के वैध स्वामित्व को सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को भी नई गति देगी।

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