Statue of Oneness Controversy: स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। ओंकारेश्वर में नर्मदा किनारे बनी आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर तकनीकी खामियों के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की शिकायत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है। वहीं राज्य सरकार ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित है और अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार बनाई गई है।
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद की शुरुआत तब हुई जब इस परियोजना से जुड़े पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) के फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने 13 मई को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 2300 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। शिकायत में एक अंतरराष्ट्रीय स्ट्रक्चरल एनालिसिस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है।
तकनीकी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद से जुड़ी शिकायत के अनुसार, प्रतिमा के एक प्रमुख स्ट्रक्चरल हिस्से में तकनीकी समस्या सामने आई है। आरोप है कि डिजाइन समीक्षा के दौरान कुछ स्ट्रक्चरल एलिमेंट तय मानकों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर रहे थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि पिछले कई महीनों से इस विषय पर चिंता जताई जा रही थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
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शिकायतकर्ता को पद से हटाने का भी आरोप
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद में यह भी दावा किया गया है कि जिस अधिकारी ने संरचना से जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी दी, उन्हें बाद में पद से हटा दिया गया। इस आरोप ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से अलग से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने बड़े सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई।
सरकार ने सभी आरोपों को बताया निराधार
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद पर मध्य प्रदेश सरकार ने विस्तृत बयान जारी कर कहा कि प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है। सरकार के अनुसार इसका निर्माण देश की प्रमुख कंपनी एल एंड टी (L&T) ने किया है। परियोजना में माइनहार्ट सिंगापुर और सी.पी. कुकरेजा एसोसिएट्स जैसे विशेषज्ञ संस्थानों की भी भूमिका रही है।
IIT और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का हवाला
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद पर सरकार का कहना है कि प्रतिमा का भूकंपीय विश्लेषण IIT मद्रास और डिजाइन का तकनीकी मूल्यांकन IIT दिल्ली ने किया है। सरकार के मुताबिक IIT दिल्ली ने प्रतिमा की अनुमानित डिजाइन लाइफ 500 वर्ष से अधिक बताई है। साथ ही जर्मनी की विंड इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा किए गए परीक्षण में भी प्रतिमा को तेज हवा के दबाव को सहने योग्य पाया गया।
फिलहाल आरोप और सरकारी दावे आमने-सामने
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद में अभी दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक ओर शिकायतकर्ता तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार प्रतिमा को पूरी तरह सुरक्षित बता रही है। फिलहाल किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है, इसलिए मामले का निष्कर्ष आना बाकी है।
आगे क्या होगा?
स्टैच्यू ऑफ वननेस विवाद अब जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के अगले चरण पर निर्भर करेगा। यदि शिकायत पर संबंधित एजेंसियां जांच शुरू करती हैं तो तकनीकी रिपोर्ट, निर्माण प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा की जा सकती है। वहीं सरकार का कहना है कि जनता को प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।







