Harsud Displaced Families: रामचंद्र कासडे \हरसूद। मध्य प्रदेश के हरसूद में वर्षों पहले विस्थापन का दर्द झेल चुके परिवार एक बार फिर अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। पुनर्वास के लंबे समय बाद भी मूलभूत सुविधाओं और सरकारी वादों के अधूरे रहने से नाराज विस्थापित परिवारों और युवाओं ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) हरसूद को ज्ञापन सौंपकर अपनी चार प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास नीति के तहत किए गए कई वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। रोजगार, आवासीय अधिकार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में हजारों परिवार आज भी संघर्षपूर्ण जीवन जीने को मजबूर हैं।
रोजगार नहीं मिलने से युवाओं में बढ़ रहा असंतोष
Harsud Displaced Families: ज्ञापन में बताया गया कि पुनर्वास नीति के अनुसार शिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अधिकांश युवाओं को नौकरी नहीं मिल सकी। क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित नहीं होने से बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और युवा पलायन करने को मजबूर हैं।विस्थापित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि पुनर्वास नीति का पालन करते हुए प्रत्येक पात्र शिक्षित युवक-युवती को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाए।
पट्टों का मालिकाना हक देने की उठाई मांग
विस्थापितों ने कहा कि पुनर्वास के दौरान मिले आवासीय पट्टों का अब तक पूर्ण मालिकाना हक नहीं दिया गया है। इससे परिवारों को कई प्रशासनिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ज्ञापन में मांग की गई है कि सभी पात्र परिवारों को जल्द से जल्द उनके आवासीय भूखंडों का पूर्ण स्वामित्व अधिकार दिया जाए।
उद्योग और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी मांग
Harsud Displaced Families: विस्थापितों ने हरसूद क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने की मांग भी उठाई है, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके और आर्थिक स्थिति मजबूत हो।इसके साथ ही सिविल अस्पताल हरसूद में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
Harsud Displaced Families: ज्ञापन में प्रशासन से मांगों पर संवेदनशीलता के साथ जल्द निर्णय लेने की अपील की गई है। विस्थापित परिवारों ने स्पष्ट कहा कि यदि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
विस्थापितों की प्रमुख मांगें:-
पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक शिक्षित विस्थापित युवा को सरकारी नौकरी।
सभी विस्थापित परिवारों को आवासीय पट्टों का पूर्ण मालिकाना हक।
हरसूद क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं।







