King Charles Income: लंदन/बिजनेस डेस्क: ब्रिटेन के आलीशान महलों में रहने वाले शाही खानदान के लोग न सिर्फ राजसी ठाठ-बाट से रहते हैं, बल्कि दुनिया भर में इसी शानो-शौकत के साथ यात्रा भी करते हैं। हालांकि, शाही खानदान के पास आने वाले धन की व्यवस्था थोड़ी जटिल है, जो बीते कई सदियों में विकसित हुई है। शाही परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे इस आमदनी और खर्च को ज्यादा पारदर्शी बनाना चाहते हैं, फिर भी इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा निजी और गुप्त रखा जाता है। हाल ही में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स पहले ऐसे राजा बन गए हैं जिन्होंने यह सार्वजनिक किया है कि वह कितना टैक्स देते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद दिलचस्प है कि आखिर राजा और उनके परिवार की यह अरबों की कमाई कहां से और कैसे होती है?
सरकारी फंड और ‘क्राउन इस्टेट’ का वित्तीय गणित
किंग चार्ल्स को राष्ट्रप्रमुख के रूप में अपनी भूमिका निभाने, आधिकारिक दायित्वों को पूरा करने और परिवार के शाही कर्तव्यों के लिए मुख्य रूप से ‘सोवेरिन ग्रांट’ (Sovereign Grant) यानी सरकारी फंड मिलता है। हर साल ब्रिटेन की सरकार यह धन शाही महलों, आवासों, ऐतिहासिक इमारतों की देखरेख और यात्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए देती है।
इस धन की गणना ‘क्राउन इस्टेट’ से होने वाले मुनाफे के आधार पर की जाती है, जिसमें शाही परिवार की विधिक मिल्कियत वाली ढेर सारी जमीनें और सागर के हिस्से शामिल हैं। साल 1760 में राजा ने इससे होने वाली आय को एक सालाना भुगतान के बदले सरकार को सौंप दिया था। यह सरकारी फंड इन संपत्तियों से होने वाली आय का करीब 12 फीसदी होता है। हाल के वर्षों में सागर तट से दूर बनने वाली विंडफार्मों के लाइसेंस की वजह से यह आय काफी बढ़ी है। वर्ष 2025/26 में शाही परिवार को इसके जरिए 13.21 करोड़ पाउंड मिले थे, जो वर्ष 2026/27 में बढ़कर 13.97 करोड़ पाउंड हो गए हैं।
डची ऑफ लैंकस्टर और डची ऑफ कॉर्नवाल से निजी कमाई
सरकारी फंड के अलावा राजा की निजी आय का मुख्य जरिया ‘डची ऑफ लैंकस्टर’ (Duchy of Lancaster) है। लगभग 41,910 एकड़ में फैले इस इस्टेट की कुल विधिक कीमत मार्च 2026 में 68.73 करोड़ पाउंड आंकी गई थी। राजा इसकी जमीन बेच नहीं सकते, लेकिन इसके शुद्ध मुनाफे पर उनका पूरा अधिकार होता है, जो वर्ष 2025/26 में करीब 2.52 करोड़ पाउंड था। इस पैसे का इस्तेमाल वे अपने निजी घरों और उन शाही सदस्यों के खर्चों के लिए करते हैं जिन्हें बाहर से कमाने की इजाजत नहीं होती।
वहीं दूसरी ओर, शाही परिवार के उत्तराधिकारी प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी केट मिडलटन की आय का जरिया ‘डची ऑफ कॉर्नवाल’ (Duchy of Cornwall) है। 128,151 एकड़ में फैले इस इस्टेट का कुल मूल्य मार्च 2026 के आखिर में करीब 1.2 अरब पाउंड था, जिससे प्रिंस विलियम को वर्ष 2025/26 में 2.155 करोड़ पाउंड का शुद्ध राजस्व हासिल हुआ।
स्वेच्छा से टैक्स चुका रहे हैं किंग और प्रिंस विलियम
ब्रिटेन के कानून के मुताबिक, राजा को टैक्स देने की कोई विधिक बाध्यता नहीं है। हालांकि, 1993 में तत्कालीन क्वीन एलिजाबेथ ने स्वेच्छा से आयकर देना शुरू किया था। उनके बाद किंग चार्ल्स ने भी इस परंपरा को निभाया है। सार्वजनिक किए गए आंकड़ों के मुताबिक, किंग चार्ल्स ने वर्ष 2024/25 में 1.29 करोड़ पाउंड और 2023/24 में 1.17 करोड़ पाउंड का टैक्स चुकाया है। राजा बनने के बाद से वे अब तक कुल 3 करोड़ पाउंड की रकम टैक्स के रूप में दे चुके हैं, जिससे वह ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले शीर्ष 100 लोगों की सूची में शामिल हो गए हैं। वहीं, प्रिंस विलियम ने भी उत्तराधिकारी बनने के बाद से अब तक करीब 2 करोड़ पाउंड का टैक्स चुकाया है।
ब्रिटिश राजशाही के प्रति बदल रहा है जनता का नजरिया
900 साल से भी अधिक पुरानी इस ब्रिटिश राजशाही को लेकर अब वहां की जनता, विशेषकर युवाओं का रुख तेजी से बदल रहा है। ‘यूगव’ (YouGov) के एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, 18 से 24 वर्ष के 41% युवा अब राजशाही व्यवस्था के बजाय एक निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष (लोकतंत्र) चाहते हैं, जबकि केवल 31% युवा ही राजशाही के समर्थन में हैं। दो साल पहले तक 46% युवा राजशाही के समर्थक थे। हालांकि, बुजुर्गों (65 वर्ष से अधिक) में आज भी 81% लोग राजशाही का पुरजोर समर्थन करते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो ब्रिटेन की 61% जनता आज भी राजशाही व्यवस्था के साथ खड़ी है, जिससे तमाम विवादों के बाद भी शाही परिवार का दबदबा फिलहाल मजबूती से कायम है।







