Saturday, August 22, 2026
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Champat Rai Resignation: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: आरोपों पर चंपत राय का इस्तीफा, पत्र लिख बोले- ‘आपदा काल में होती है परीक्षा, सामने आएगा सत्य’

Champat Rai Resignation: अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने देशव्यापी तूल पकड़ लिया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में रहे श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद, अब उनकी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। लंबे समय से इस मामले पर मौन साधे चंपत राय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (ट्विटर) पर हाथ से लिखा एक पत्र साझा किया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने न सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई दी है, बल्कि विरोधियों को रामचरितमानस की चौपाइयों के जरिए संदेश भी दिया है।

‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी’— चौपाई से की पोस्ट की शुरुआत

चंपत राय ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से हस्तलिखित पत्र की तस्वीर साझा करते हुए गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के अयोध्याकांड की प्रसिद्ध चौपाई लिखी है। उन्होंने लिखा, “धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी।” इस चौपाई के माध्यम से उन्होंने संकेत दिया है कि संकट के समय ही किसी भी व्यक्ति के धैर्य और धर्म की असली परीक्षा होती है। पत्र की शुरुआत करते हुए उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि जून के महीने से ही मंदिर परिसर में दानपात्र की गणना के दौरान हुई चोरी को लेकर कई तरह की अफवाहें और चर्चाएं बाजार में गर्म हैं।

मेरे ऊपर लगाए गए अनर्गल आरोप: चंपत राय

विवादों से घिरे पूर्व महासचिव ने अपने पत्र में तीखा दर्द बयां करते हुए लिखा, “व्यक्तिगत रूप से मेरे ऊपर अनेकों ने अनर्गल आरोप लगाए हैं, जिसके बाद मैंने मौन धारण कर लिया था।” उन्होंने आगे बताया कि मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। चंपत राय के अनुसार, यद्यपि यह रिपोर्ट परम गोपनीय थी, लेकिन अब यह सार्वजनिक हो चुकी है। उन्होंने देश और रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जैसे ही एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आएगी, वह पॉइंट-बाय-पॉइंट (क्रमानुसार) सभी फैलाए जा रहे बिंदुओं पर अपना विस्तृत उत्तर देंगे और पूरा सत्य देश के सामने आ जाएगा।

45 वर्षों का प्रचारक जीवन एक खुली पुस्तक

अपने सार्वजनिक जीवन की शुचिता का हवाला देते हुए चंपत राय ने भावुक अंदाज में लिखा कि वह अक्टूबर 1991 से संगठन (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) द्वारा अयोध्या भेजे गए थे। उन्होंने कहा, “मेरा प्रचारक जीवन 45 वर्ष का रहा है। मैं जहां-जहां भी रहा हूं, मेरा जीवन एक खुली पुस्तक के समान रहा है।” पत्र के अंत में उन्होंने सभी को आदर पूर्वक नमस्कार करते हुए अपनी बात समाप्त की है।

गौरतलब है कि राम मंदिर जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले में वित्तीय अनियमितता और चोरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट की साख पर सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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