Sattu Benefits: News Desk / Health। उत्तर और मध्य भारत में मई के महीने के साथ ही सूरज के तेवर तल्ख हो चुके हैं। इस भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और लू (Heatwave) से खुद को सुरक्षित रखने के लिए लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद जूस या कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। परंतु, ये कृत्रिम पेय शरीर को तात्कालिक राहत तो दे सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक रूप से सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का पारंपरिक और सदियों पुराना ‘सत्तू’ आज भी गर्मी से राहत देने वाले सबसे असरदार देसी सुपरफूड्स में शीर्ष पर गिना जाता है। भुने हुए चने से तैयार होने वाला यह नेचुरल एनर्जी ड्रिंक न केवल शरीर को अंदरूनी ठंडक प्रदान करता है, बल्कि डिहाइड्रेशन, मौसमी कमजोरी और पेट की गंभीर समस्याओं से बचाने में एक विधिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
पोषक तत्वों का पावरहाउस है सत्तू: क्यों है यह इतना खास?
आधुनिक आहार विशेषज्ञों (Dietitians) और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, सत्तू को केवल एक पारंपरिक पेय समझना भूल होगी; यह वास्तव में पोषक तत्वों का एक उत्कृष्ट भंडार है।
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प्रमुख घटक: सत्तू मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले भुने हुए चनों को पीसकर तैयार किया जाता है।
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पोषक तत्व: इसमें प्रचुर मात्रा में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, डाइटरी फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे अत्यंत आवश्यक मिनरल्स पाए जाते हैं। यह सारे तत्व भीषण गर्मी के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।

लू और डिहाइड्रेशन के विरुद्ध अचूक ढाल
गर्मी के मौसम में तेज धूप के कारण शरीर से पसीने के रूप में पानी और जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) तेजी से बाहर निकलने लगते हैं। इसी असंतुलन की वजह से लोगों को अचानक चक्कर आना, अत्यधिक थकान, डिहाइड्रेशन और लू लगने जैसी शिकायतें होती हैं।
विशेषज्ञों का मत: आर्टेमिस हॉस्पिटल्स (Artemishospitals) के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सत्तू की तासीर प्राकृतिक रूप से बेहद ठंडी होती है। जब सत्तू को ठंडे पानी, भुने जीरे, काले नमक और नींबू या फिर ताज़ा छाछ (Buttermilk) के साथ मिलाकर पिया जाता है, तो यह शरीर के आंतरिक तापमान को तुरंत नियंत्रित कर देता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में जल स्तर का संतुलन बनाए रखते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण अंचलों में खेतों में कड़ी धूप में काम करने वाले किसान आज भी घर से निकलने से पहले सत्तू का शरबत पीना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।
पाचन क्रिया में सुधार और पेट के विकारों से मुक्ति
गर्मियों के दिनों में पाचन तंत्र थोड़ा संवेदनशील और धीमा हो जाता है, जिससे भारी या तली-भुनी चीजें खाने पर गैस, एसिडिटी और कब्ज (Constipation) की समस्या आम हो जाती है।
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फाइबर से भरपूर: सत्तू में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह आंतों की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाता है और पेट को साफ रखने में मदद करता है। गर्मी में गरिष्ठ भोजन की जगह सत्तू का हल्का सेवन पेट को शांत रखता है।
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डायबिटीज में सुरक्षित: डॉक्टरों के मुताबिक, सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) काफी कम होता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इसके सेवन से ब्लड शुगर का स्तर अचानक से तेजी से नहीं बढ़ता। इसलिए, मधुमेह (Diabetes) के रोगी भी बिना किसी संकोच के सीमित और उचित मात्रा में इसका नियमित सेवन कर सकते हैं।
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वजन नियंत्रण (Weight Loss): सत्तू में मौजूद लीन प्रोटीन के कारण इसके सेवन के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है (Satiety)। इससे बार-बार होने वाली ‘फूड क्रेविंग’ या बेवजह भूख लगने की आदत पर लगाम लगती है, जो वजन को नियंत्रित करने में बेहद मददगार साबित होती है।

सेवन के दौरान बरतें यह विशेष सावधानी: अति सर्वत्र वर्जयेत
यद्यपि सत्तू के स्वास्थ्य लाभ अनगिनत हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके अत्यधिक या अनियंत्रित सेवन को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी जारी की है।
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सीमित मात्रा जरूरी: सत्तू का सेवन हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता और सही मात्रा में ही करना चाहिए। चूंकि यह चने से बनता है और अत्यधिक भारी व फाइबर युक्त होता है, इसलिए आवश्यकता से अधिक मात्रा में इसका सेवन करने पर कुछ संवेदनशील लोगों को पेट फूलना (Bloating), भारीपन या पेट में गैस बनने जैसी असुविधाजनक दिक्कतें हो सकती हैं।
यदि सही संतुलन और उचित तरीके से सत्तू को अपनी समर डाइट का हिस्सा बनाया जाए, तो यह इस भीषण गर्मी में महंगे सप्लीमेंट्स और दवाओं से कहीं अधिक कारगर और किफायती स्वास्थ्य रक्षक साबित होगा।









