Raisen Water Crisis: सागौर हादसे के बाद जागा प्रशासन,अब कुआं खोदने की तैयारी; तीन मासूमों की मौत ने खोली पेयजल संकट और लापरवाही की पोल

Raisen Water Crisis: राजू बैरागी\ रायसेन। जिले की जनपद पंचायत गैरतगंज अंतर्गत आदिवासी बहुल ग्राम सागौर में तीन मासूम बालिकाओं की कुएं में डूबकर हुई दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक हादसे के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है और गांव में पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए नए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। रविवार सुबह कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी समेत प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया और ग्रामीणों को जल्द बेहतर पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

Raisen Water Crisis: हालांकि इस दुखद घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन तीन मासूम बच्चियों की मौत का जिम्मेदार कौन है? ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या और संबंधित विभागों की अनदेखी ने इस त्रासदी को जन्म दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते गांव में पर्याप्त पानी की व्यवस्था कर दी जाती, तो बच्चियों को दूर स्थित कुएं तक नहीं जाना पड़ता और शायद उनकी जान बच सकती थी।

सालों से पानी के संकट से जूझ रहा है सागौर

Raisen Water Crisis:करीब सवा पांच सौ की आबादी वाले सागौर गांव में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर पीएचई विभाग द्वारा तीन ट्यूबवेल खुदवाए गए थे, लेकिन भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण दो ट्यूबवेल लगभग जवाब दे चुके हैं। तीसरे ट्यूबवेल से भी बेहद सीमित मात्रा में पानी निकल रहा है। परिणामस्वरूप पूरे गांव की निर्भरता एक ही जल स्रोत पर आकर टिक गई है।

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Raisen Water Crisis:ग्राम पंचायत द्वारा एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की व्यवस्था की जाती है, लेकिन यह पूरी तरह बिजली पर निर्भर है। बिजली कटौती होते ही जल आपूर्ति ठप हो जाती है। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चियों को रोजाना दूर-दराज के खेतों, ट्यूबवेलों और कुओं तक पानी भरने जाना पड़ता है।

एक को बचाने में चली गई तीन मासूमों की जान

Raisen Water Crisis:शनिवार सुबह गांव की चार बच्चियां पानी भरने और नहाने के लिए गांव के कुएं पर पहुंची थीं। बताया जाता है कि इसी दौरान एक बच्ची का पैर फिसल गया और वह कुएं में गिर गई। उसे बचाने के लिए दूसरी बच्चियां भी कुएं में उतर गईं, लेकिन एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में तीन बच्चियां गहरे पानी में डूब गईं। इस दर्दनाक हादसे में तीनों की मौत हो गई, जबकि पूरे गांव में मातम छा गया।

Raisen Water Crisis:मासूम बेटियों की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर ओर शोक और गुस्से का माहौल देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल हादसा नहीं, बल्कि वर्षों की प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है।

हादसे के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन

Raisen Water Crisis:घटना के दूसरे दिन रविवार को जिला प्रशासन की टीम सागौर पहुंची। कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और पीएचई विभाग के अधिकारियों को तत्काल वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन ने गांव में नया कुआं खोदने, अतिरिक्त पानी के टैंकर भेजने तथा खराब पड़े जल स्रोतों को दुरुस्त करने की योजना पर काम शुरू करने की बात कही है।

Raisen Water Crisis:इसके बावजूद ग्रामीण प्रशासनिक दावों से संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना है कि वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब जब तीन बच्चियों की मौत हो गई, तब प्रशासन जागा है।

ग्रामीणों ने उठाए जिम्मेदारी तय करने के सवाल

Raisen Water Crisis:ग्रामीणों का कहना है कि केवल नई योजनाओं और आश्वासनों से समस्या का समाधान नहीं होगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह तय किया जाना चाहिए कि पेयजल संकट के लिए कौन जिम्मेदार है और समय पर समाधान क्यों नहीं किया गया। ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

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Raisen Water Crisis:गांव की निवासी ममता बाई गौंड का कहना है कि सागौर में अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद न तो अधिकारियों ने और न ही जनप्रतिनिधियों ने स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।

Raisen Water Crisis:वहीं सरस्वती देवी गौंड ने उम्मीद जताई कि कलेक्टर द्वारा बनाई गई नई जल आपूर्ति व्यवस्था से गांव को कुछ राहत मिल सकती है और भविष्य में लोगों को पानी के लिए इतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

जल संकट की गंभीर तस्वीर

Raisen Water Crisis:सागौर की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में गहराते जल संकट की भयावह तस्वीर भी सामने लाती है। जिले के कई गांवों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, हैंडपंप और ट्यूबवेल सूख रहे हैं और लोग पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यह हादसा प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए चेतावनी है कि पेयजल संकट को गंभीरता से लेते हुए समय रहते ठोस और स्थायी समाधान सुनिश्चित किए जाएं।

अधिकारियों की मौजूदगी

Raisen Water Crisis:रविवार को सागौर पहुंचे अधिकारियों में कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी, सहायक कलेक्टर एवं गैरतगंज एसडीएम अंकित जैन, एसडीओ आरईएस नरेश राज ठाकरे, पीएचई ईई गिरीश कांबले और एसडीओ नलिन सिरोही सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

अधिकारियों का पक्ष

Raisen Water Crisis:जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी ने कहा कि तीन बालिकाओं की मौत की दुखद घटना से सबक लेते हुए कलेक्टर ने पीएचई विभाग को नए जल स्रोतों से नियमित पानी सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सागौर गांव में लंबे समय से बनी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

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