Gayatri Mahayagya Ratlam : रतलाम। जिला सर्किल जेल रतलाम में सोमवार को आध्यात्मिक चेतना और आत्म-सुधार की एक नई लहर देखी गई। गायत्री शक्तिपीठ के तत्वावधान में जेल परिसर के भीतर भव्य पंचकुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में जेल के बंदियों ने हिस्सा लिया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा आत्म-कल्याण का संकल्प लिया।
वैदिक पद्धति से संपन्न हुआ पूजन यज्ञ का शुभारंभ गुरु ईश वंदना, षटकर्म और देव पूजन के साथ हुआ। गायत्री परिवार के विद्वानों द्वारा किए गए स्वस्ति वाचन और अग्नि स्थापना के पश्चात गायत्री मंत्र, गणपति, नवग्रह और षोडश मातृका की आहुतियां समर्पित की गईं। कार्यक्रम के अंत में महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए पूर्णाहुति दी गई।
स्वयं को श्रेष्ठ बनाने का संदेश इस अवसर पर गायत्री परिवार नीमच के वरिष्ठ सदस्य प्रभुलाल धाकड़ ने युग ऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा के संदेशों को बंदियों के बीच रखा। उन्होंने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है, जिसे लोभ, मोह और अहंकार जैसी बुराइयों में पड़कर नष्ट नहीं करना चाहिए। वहीं श्रीमती मंजुला शर्मा ने गायत्री महामंत्र की महिमा बताते हुए बंदियों को श्रेष्ठ मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
जेल प्रशासन की पहल जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया ने गायत्री परिवार रतलाम एवं नीमच के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि जेल का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि सुधार करना भी है। ऐसे आयोजनों से बंदियों की मानसिक स्थिति में सुधार आता है और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार होते हैं। कार्यक्रम में पातिराम शर्मा, अशोक धाकड़ और सहयोगी दल सहित महिला मंडल की सक्रिय सहभागिता रही।









