सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांवों में स्थायी विकास और आजीविका आधारित परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी फोकस करेगी।
अब 100 नहीं, 125 दिन रोजगार की गारंटी
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि नई योजना ग्रामीण भारत के लिए “नई सुबह” साबित होगी।
उन्होंने बताया कि नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि मनरेगा के तहत यह सीमा 100 दिन थी।सरकार का कहना है कि इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन कम करने में मदद मिलेगी।
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किन कामों पर होगा फोकस?
नई योजना के तहत गांवों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
- जल संरक्षण परियोजनाएं
- ग्रामीण सड़कें और पुल-पुलिया
- स्कूल भवन और आंगनवाड़ी केंद्र
- कृषि आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर
- SHG और FPO के लिए कार्यस्थल
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रिटेनिंग वॉल
सरकार का कहना है कि इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
कितना होगा योजना का बजट?
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान किया है। राज्यों की हिस्सेदारी जोड़ने पर कुल खर्च 1.51 ट्रिलियन रुपये से अधिक रहने का अनुमान है।सरकार इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत, विकसित गांव” विजन का अहम हिस्सा बता रही है।
मजदूरों के भुगतान पर बड़ा दावा
नई योजना में मजदूरों के भुगतान को लेकर भी कई बदलाव किए गए हैं। मजदूरी सीधे बैंक या डाकघर खातों में DBT के जरिए भेजी जाएगी।
सरकार का लक्ष्य तीन दिनों के भीतर भुगतान करने का है, जबकि अधिकतम सीमा 15 दिन तय की गई है। यदि भुगतान में देरी होती है तो मजदूरों को मुआवजा दिया जाएगा।इसके अलावा, काम मांगने के बावजूद रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान रहेगा।
राज्यों को मिला संक्रमण काल
सरकार ने साफ किया है कि MGNREGA के तहत चल रहे सभी कार्य फिलहाल जारी रहेंगे और अधूरे प्रोजेक्ट 1 जुलाई तक पूरे किए जाएंगे।राज्यों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। हालांकि जुलाई 2026 के बाद ग्रामीण रोजगार से जुड़ी फंडिंग सिर्फ VB-G RAM G फ्रेमवर्क के तहत जारी होगी।