कोलकाता : भारत में मुख्यमंत्री को मिलने वाला सरकारी आवास किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि यह पद से जुड़ी आधिकारिक सुविधा मानी जाती है। जैसे ही कोई मुख्यमंत्री पद छोड़ता है, उसके साथ उस आवास पर अधिकार भी समाप्त हो जाता है। यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन के बाद नए मुख्यमंत्री को वही सरकारी आवास सौंपा जाता है।
आवास खाली करने के लिए कितना समय मिलता है?
सामान्य तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी आवास खाली करने के लिए कुछ दिनों से लेकर अधिकतम एक महीने तक का समय दिया जाता है। अलग-अलग राज्यों में यह अवधि 15 से 30 दिन तक हो सकती है। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री को नई रहने की व्यवस्था करने का अवसर मिलता है।
यदि तय समय सीमा के भीतर आवास खाली नहीं किया जाता, तो संबंधित विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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क्या कहते हैं सरकारी नियम?
सरकारी नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक को आवास केवल उनके कार्यकाल तक ही आवंटित रहता है। पद समाप्त होने के बाद आवास का अधिकार भी खत्म माना जाता है।
हालांकि कुछ मामलों में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुरक्षा कारणों या विशेष प्रावधानों के तहत वैकल्पिक सरकारी आवास उपलब्ध कराया जा सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में बने रहने की अनुमति सामान्यतः नहीं होती।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
देश के कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी आवास खाली करने की प्रक्रिया देखी जा चुकी है। कुछ मामलों में नेताओं ने समय रहते बंगला खाली कर दिया, जबकि कुछ मामलों में नोटिस जारी करने तक की नौबत आई।बिहार समेत कई राज्यों में राजनीतिक बदलाव के बाद मुख्यमंत्री आवास को लेकर चर्चाएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं।
बंगाल में आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी। इसके तहत नए मुख्यमंत्री को सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा। नियमों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवास खाली करना होगा।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक और संवैधानिक नियमों के तहत संचालित होती है।









