Vedanta plant blast : सक्ती : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट ने एक बड़ी औद्योगिक त्रासदी का रूप ले लिया है। अब तक 16 मजदूरों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Vedanta plant blast : घटना दोपहर करीब 2 बजे हुई, जब प्लांट में अचानक बॉयलर फट गया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कुछ ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में इस हादसे को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दीपक बैज ने इसे “हादसा नहीं, हत्या” बताते हुए मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की। वहीं टीएस सिंहदेव ने प्लांट में एंबुलेंस तक न होने पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर लापरवाही बताया।
चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने आरोप लगाया कि प्लांट की मशीनों की सही तरीके से मरम्मत नहीं की गई थी और क्षमता से ज्यादा दबाव में संचालन किया जा रहा था, जिससे यह विस्फोट हुआ। कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी को हादसे की बड़ी वजह बताया।
सरकार की ओर से विष्णुदेव साय ने दुख जताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। नरेंद्र मोदी की ओर से भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मुआवजे की घोषणा की गई है।
मुआवजे को लेकर अलग-अलग घोषणाएं हुई हैं। कंपनी प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपए और नौकरी देने की बात कही है, जबकि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से भी अतिरिक्त सहायता राशि घोषित की गई है।
Vedanta plant blast : जांच के लिए प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, वहीं कांग्रेस ने भी अपनी 9 सदस्यीय जांच समिति बनाई है जो मौके पर जाकर पूरी घटना की समीक्षा करेगी।
Vedanta plant blast : यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। अब असली मुद्दा यह है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और जिम्मेदार लोगों पर कितनी ठोस कार्रवाई होती है।











