Sunday, September 20, 2026
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TS Singhdev : हिड़मा के मारे जाने पर टीएस सिंहदेव का बयान—कहा, हिंसा चुनने वालों का अंत भी वैसा ही, झीरम घाटी हमले को लेकर कही ये बात

TS Singhdev
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TS Singhdev : रायपुर : नक्सली नेता हिड़मा की मौत पर टीएस सिंहदेव ने कहा कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों का अंत भी हिंसक होता है। उन्होंने कहा कि हिड़मा नक्सलियों का बड़ा लीडर था और उसकी मौत सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि लगातार कार्रवाई के चलते कई नक्सली हथियार डाल रहे हैं।

TS Singhdev : झीरम घाटी हमले पर सिंहदेव ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हिड़मा का नाम उस घटना में आया जरूर, लेकिन यह एक साधारण नक्सली घटना नहीं बल्कि प्रायोजित हमला था। जांच ठीक से हुई ही नहीं, इसलिए अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है।

TS Singhdev : नक्सल मुद्दे पर भाजपा के क्रेडिट लेने को लेकर सिंहदेव ने कहा कि दो साल में कार्रवाई तेज हुई है, इसके प्रमाण हैं, लेकिन नक्सलवाद खत्म करने की कोशिश पिछले एक दशक से चल रही है। कांग्रेस सरकार में भी कई बड़े एनकाउंटर हुए। उन्होंने कहा कि यह श्रेय लेने का विषय नहीं, बल्कि संयुक्त कार्रवाई का नतीजा है। मार्च 2026 से पहले भी नक्सलवाद खत्म हो सकता है, अगर जमीनी स्तर पर लोग कहें कि गतिविधियां बंद हो गई हैं।

TS Singhdev : धान खरीदी पर सिंहदेव ने सरकार की नीति को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पहले 72 घंटे के भीतर धान उठाव का नियम था, अब भंडारण की कमी के कारण किसानों को नुकसान हो रहा है। 4–5% नमी घटने पर वजन कम होता है जिसका नुकसान मार्कफेड उठाता है। खरीददारी के लिए जिन सहकारी कर्मचारियों की जरूरत है, उनकी मांग पूरी नहीं की जा रही।

TS Singhdev : SIR फॉर्म प्रक्रिया पर टीएस सिंहदेव ने कहा कि यह इतना जटिल है कि educated लोग भी कई बार सोचते हैं कि कहीं गलती न हो जाए। ऐसे में अबूझमाड़ और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए इसे समझना बेहद मुश्किल है। 2003 की सूची की फोटोकॉपी लोगों के पास नहीं है, गांवों में फॉर्म बांटने में अव्यवस्था है, फोटो लगे या न लगे—नियम स्पष्ट नहीं हैं। गलत भरा फॉर्म सीधे रिजेक्ट होगा, इसलिए आधे से ज्यादा ग्रामीणों के नाम जुड़ ही नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि BLO और वार्ड मेंबर के बीच समन्वय की भारी कमी है और प्रक्रिया इतनी कठिन है कि लोगों के नाम कट जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा।

 

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