Tribal Culture Chhattisgarh : रोशन सेन/माकड़ी (कोण्डागांव): बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और कला को समर्पित ‘बस्तर पंडूम’ का शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को मकड़ी के मंडी प्रांगण में भव्य समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस सांस्कृतिक महाकुंभ ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि दूर-दराज से आए आगंतुकों को भी बस्तर की अनोखी और गौरवशाली विरासत से मंत्रमुग्ध कर दिया।
समापन समारोह के दौरान पूरा मंडी प्रांगण बस्तर के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और थिरकते कदमों से सराबोर रहा। विभिन्न अंचलों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक नृत्यों और लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिसने बस्तर की जीवंत संस्कृति को मंच पर साक्षात कर दिया। कार्यक्रम में लगे हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के स्टॉल्स पर भी भारी भीड़ देखी गई, जहाँ लोगों ने बस्तरिया कलाकृतियों की जमकर खरीदारी की।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि ‘बस्तर पंडूम’ का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। इस महोत्सव के माध्यम से सामाजिक एकता और समरसता का सुंदर संदेश प्रसारित हुआ। ग्राम सरपंच रुखमनी पोयाम सहित उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस सफल आयोजन की सराहना की और विश्वास जताया कि भविष्य में यह उत्सव और भी व्यापक रूप लेगा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्थानीय अधिकारियों, कर्मचारी गणों और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों की उपस्थिति ने इस उत्सव को यादगार बना दिया। आयोजन की सफलता से गदगद स्थानीय निवासियों ने इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने वाला एक मील का पत्थर बताया है।









