PM Awas Yojana Dispute : रायसेन। जनपद पंचायत सांची के ग्राम पंचायत सेहतगंज स्थित टेढ़िया पुल के समीप वन विभाग की एक विवादित कार्रवाई ने करीब एक दर्जन गरीब परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर कर दिया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान इन पीड़ित परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों पर बिना किसी पूर्व नोटिस के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है।
बिना नोटिस की कार्रवाई से फूटा गुस्सा जनसुनवाई में एसडीएम मनीष शर्मा को अपनी व्यथा सुनाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और सरकारी सहायता से अपने आशियाने तैयार किए थे। वन अमले ने अचानक पहुंचकर मकानों को ध्वस्त कर दिया, जिससे न केवल उनके सिर से छत छिन गई, बल्कि घरेलू सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया। भीषण गर्मी के इस मौसम में अब छोटे बच्चों और महिलाओं के सामने रहने और खाने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन और वन विभाग के अलग-अलग दावे इस मामले में प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर विरोधाभासी बातें सामने आई हैं। जहाँ एक ओर एसडीएम मनीष शर्मा ने शिकायत आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मामले की तथ्यात्मक जांच कराने का आश्वासन दिया है, वहीं उपवन मंडल अधिकारी सुधीर पटले ने कार्रवाई को उचित ठहराया है। पटले का कहना है कि पश्चिमी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर विभाग द्वारा यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वन क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलता।
न्याय और पुनर्वास की मांग पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए तत्काल पुनर्वास की मांग की है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि वे अतिक्रमणकारी थे, तो उन्हें पहले नोटिस क्यों नहीं दिया गया? फिलहाल, जिला प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वन भूमि पर निर्माण और उसे तोड़े जाने की इस प्रक्रिया में किसकी चूक रही है।
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पीड़ित परिवार: “बिना किसी सूचना के हमारे मकान तोड़ दिए गए, हम अब छोटे बच्चों को लेकर इस गर्मी में कहाँ जाएँ?”
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मनीष शर्मा (SDM, रायसेन): “शिकायत मिली है, पूरे मामले की गंभीरता से और तथ्यात्मक जांच कराई जाएगी।”
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सुधीर पटले (उपवन मंडल अधिकारी): “वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया गया है। वन भूमि पर पीएम आवास का लाभ नहीं दिया जाता।”









