Big Legal Turn in Katni Archana Tiwari Case: कटनी/इंदौर। देश भर की मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले बहुचर्चित अर्चना तिवारी मिसिंग केस में अब एक चौंकाने वाला और बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। जिस मामले को शुरुआत में परिवार के दबाव और पढ़ाई के लिए स्वेच्छा से घर छोड़ने से जोड़कर देखा जा रहा था, वह अंततः मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सामने विवाह और सुरक्षा के वैधानिक अधिकार के रूप में परिणत हो गया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सारांश जोगचंद द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका की सुनवाई के दौरान अर्चना तिवारी स्वयं अदालत के समक्ष प्रस्तुत हुईं और अपने विवाह का अधिकारिक खुलासा किया।

क्या था 7 अगस्त का पूरा घटनाक्रम?
7 अगस्त 2025 को अर्चना तिवारी रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए इंदौर से अपने गृह नगर कटनी आने के लिए नर्मदा एक्सप्रेस में सवार हुई थीं। यात्रा के दौरान वे ट्रेन से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई थीं।
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राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा: मामला इतना हाई-प्रोफाइल हो गया था कि मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश में जुट गई थी।
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13 दिन बाद सकुशल बरामदगी: करीब 13 दिन बाद पुलिस ने अर्चना को सकुशल खोज निकाला। पुलिस पूछताछ में उन्होंने दावा किया था कि परिवार वाले उन पर शादी का दबाव बना रहे थे, जबकि वह आगे पढ़ाई कर अपना करियर बनाना चाहती थीं। पुलिस ने जांच के बाद इसे पूर्व-नियोजित गुमशुदगी (Planned Disappearance) माना था।
हाई कोर्ट में हुआ शादी का नया खुलासा
| घटनाक्रम | अदालत एवं कानूनी स्थिति |
| दायर याचिका | सारांश जोगचंद द्वारा इंदौर हाई कोर्ट बेंच में ‘हैबियस कॉर्पस’ याचिका। |
| अदालत में बयान | अर्चना तिवारी ने स्पष्ट कहा कि वे सारांश जोगचंद से विवाह कर चुकी हैं और अपनी मर्जी से उनके साथ रहना चाहती हैं। |
| अदालत का निर्णय | हाई कोर्ट ने अर्चना के बालिग (Adult) होने और स्वतंत्र इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें पति के साथ जाने की अनुमति दी। |
| सुरक्षा निर्देश | हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस को आदेश दिया कि नवदंपती की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। |
बयान का विरोधाभास और न्यायिक निष्कर्ष
मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जिस अर्चना तिवारी ने शुरुआत में पुलिस के सामने परिजनों द्वारा जबरन शादी कराए जाने के डर और करियर बनाने की बात कही थी, उन्होंने हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर यह स्वीकार किया कि उनका विवाह पूर्व में ही सारांश जोगचंद से हो चुका था।
अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वयस्कता के संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए याचिका का निस्तारण किया और दोनों को साथ रहने का कानूनी संरक्षण प्रदान किया। इसके साथ ही महीनों से चले आ रहे इस चर्चित मिसिंग केस का पटाक्षेप हो गया है।




