बेमेतरा-बीजापुर: धान खरीदी में गड़बड़ी! किसानों में नाराजगी, सरकारी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न…

बेमेतरा : राज्य के कृषि प्रधान जिले बेमेतरा में धान खरीदी केंद्रों पर मिलावट और गुणवत्ता की अनियमितताएं सामने आई हैं। ग्राम गाड़ाडीह उपार्जन केंद्र में जिला प्रशासन की टीम ने जांच के दौरान 5 स्टैक मोटा धान का नमूना लिया, जिसमें पुराना धान और अमानक श्रेणी का नया धान मिश्रित पाया गया। गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर कुल 10,000 बोरे धान को अस्थायी रूप से जब्त कर उनके परिवहन पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा और पारदर्शी उपार्जन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

धान की गुणवत्ता में भारी कमी

जांच के दौरान पाया गया कि उपार्जन केंद्र में धान की नमी अधिक, टूटन और मिट्टी तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ मौजूद थे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र पर धान की गुणवत्ता मानकों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है। जांच टीम का अनुमान है कि इस अनियमितता से शासन को आर्थिक नुकसान होने की संभावना है और किसानों की मेहनत पर भी असर पड़ सकता है।

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बीजापुर में धान उठाव की समस्या

बीजापुर जिले में भी स्थिति गंभीर है। जिले के 30 उपार्जन केंद्रों में केवल 1,084 मीट्रिक टन धान का उठाव हुआ है, जबकि 48,842 मीट्रिक टन धान खरीदी गई है। यह कुल खरीदी का केवल 2.22 प्रतिशत है। कर्मचारी संघ का कहना है कि जिला विपणन विभाग की सुस्ती और लापरवाही के कारण उपार्जन केंद्रों में धान का भारी जाम लग गया है। केंद्रों में बारदाना और खुले प्लेटफार्म भर जाने के कारण नए किसानों का धान लेने में बाधा आ रही है।

कर्मचारी संघ की चेतावनी

सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने कलेक्टर को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर जिला विपणन अधिकारी द्वारा समय पर धान का उठाव सुनिश्चित नहीं किया गया, तो 9 जनवरी से खरीदी बंद करनी पड़ेगी। संघ का कहना है कि लंबे समय तक धान केंद्रों में पड़े रहने से उसकी सुरक्षा और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल

किसानों की मेहनत और राज्य की खरीदी योजना पर इस गड़बड़ी से साफ़ सवाल उठते हैं। न केवल उपार्जन केंद्रों में पारदर्शिता की कमी दिखी है, बल्कि विभागीय सुस्ती और निरीक्षण की कमी ने धान खरीदी प्रक्रिया को लगभग ठप कर दिया है। इससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है और शासन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।

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