Maharashtra land scam : पुणे/मुंबई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी से जुड़े एक बड़े जमीन घोटाले ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। पुणे में दो अलग-अलग पुलिस थानों में दो एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं, हालांकि इन दोनों में ही पार्थ पवार का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है। आरोप है कि पार्थ पवार की 99% हिस्सेदारी वाली कंपनी ने ₹1800 करोड़ की सरकारी जमीन को महज ₹300 करोड़ में खरीद लिया।
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दो FIR, एक केंद्र बिंदु
यह ‘जमीन का खेल’ तब उजागर हुआ जब 7 नवंबर 2025 की सुबह पुणे के दो अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज हुईं:
FIR नंबर 1 (कोरेगांव पार्क): बावधन पुलिस स्टेशन में दर्ज इस FIR में 40 एकड़ सरकारी जमीन (सर्वे नं. 88, मौजे मुंढवा) की फर्जी दस्तावेजों के सहारे बिक्री का आरोप है। यह जमीन दलित आरक्षित ‘महार वतन’ की थी, जो 2038 तक Botanical Survey of India (BSI) को लीज पर दी गई है। आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचा गया।
FIR नंबर 2 (बोपोडी): खड़क पुलिस स्टेशन में दर्ज इस FIR में सब-डिविजनल ऑफिसर प्रवीणा बोर्डे ने तहसीलदार सूर्यकांत येवले पर अवैध आदेश जारी कर सरकारी जमीन को निजी घोषित करने की शिकायत की है।
दोनों ही मामलों में पार्थ पवार की कंपनी Amedia Enterprises LLP पर आरोप लगे हैं, जिसमें उनकी हिस्सेदारी 99% है।
Maharashtra land scam : मुख्य आरोपी और रहस्यमय किरदार
दोनों एफआईआर में कुछ प्रमुख किरदारों के नाम हैं। FIR नंबर 1 में दिग्विजय पाटिल (Amedia Enterprises LLP का पार्टनर), शीतल तेजवाणी (Power of Attorney होल्डर), और निलंबित सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तरू का नाम है। FIR नंबर 2 में सस्पेंडेड तहसीलदार सूर्यकांत येवाले, दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवाणी, और हेमंत गावंडे सहित 9 लोग शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा रहस्य शीतल तेजवाणी बनी हुई हैं, जिनके पास जमीन की ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ थी और जिन्होंने पार्थ पवार के साथ सौदा किया था। वह फिलहाल फरार हैं। माना जा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी से ही इस करोड़ों के घोटाले का पूरा सच सामने आएगा, और पार्थ पवार भी सारा ठीकरा उन पर फोड़ सकते हैं।
Maharashtra land scam : अजित पवार की सफाई और विपक्ष के सवाल
मामला सामने आने के बाद पार्थ पवार के पिता और डिप्टी सीएम अजित पवार ने सफाई देते हुए कहा कि “डील कानूनी थी या नहीं इसकी जांच होगी, लेकिन शक से बचने के लिए हमने इसे कैंसल कर दिया।” उन्होंने यह भी संकेत दिए कि शीतल तेजवाणी और दिग्विजय पाटिल ने उनकी बिना जानकारी के दस्तावेजों में बदलाव किए। हालांकि, जांच एजेंसियों को संदेह है क्योंकि कंपनी का रजिस्टर्ड पता पार्थ के बंगले से मेल खाता है, और पेपरवर्क में पार्थ पवार ही 99% ओनर के रूप में दर्ज हैं।
Maharashtra land scam : इस मामले को लेकर विपक्ष अब सवाल उठा रहा है कि कंपनी में 99% हिस्सेदारी होने के बावजूद मालिक (पार्थ पवार) का नाम एफआईआर में क्यों नहीं है। ‘महार वतन’ की सरकारी जमीन, जो 2038 तक BSI को लीज पर थी, उसे 1992 और 2023 में जिला प्रशासन द्वारा सरकारी घोषित किए जाने के बावजूद फर्जी कागजातों से बेचने की अनुमति रजिस्ट्रेशन ऑफिस ने कैसे दी, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। फिलहाल, शीतल तेजवाणी की गिरफ्तारी का इंतजार है, जो ‘जमीन के खेल’ के असली खिलाड़ी को बेनकाब कर सकती है।









