Raigarh DMF Fund Misuse : गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़/लैलूंगा। जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से गरीबों को निःशुल्क सेवा देने के लिए प्रदान किया गया शव वाहन अब विवादों के घेरे में है। लैलूंगा शासकीय अस्पताल में तैनात इस वाहन पर निजी स्वार्थ और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि यह सेवा अब “निःशुल्क” न रहकर वसूली का माध्यम बन चुकी है।
अस्पताल के बजाय चालक के घर पर पहरा नियमों के विपरीत, यह आपातकालीन वाहन अस्पताल परिसर में खड़ा होने के बजाय अधिकांश समय चालक के निजी आवास पर खड़ा रहता है। आरोप है कि जब भी किसी गरीब परिवार को शव ले जाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है, तो वाहन खराब होने का बहाना बना दिया जाता है। वहीं, जो लोग चालक की मांग के अनुसार मोटी रकम देने को तैयार होते हैं, उनके लिए वाहन तत्काल उपलब्ध हो जाता है।
निजी स्वार्थ और सरकारी ईंधन का खेल मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब यह बात सामने आई कि शव वाहन के चालक ने अपनी निजी ‘ईको एम्बुलेंस’ खरीद ली है। आरोप लग रहे हैं कि सरकारी शव वाहन को घर में खड़ा रखकर चालक अपनी निजी गाड़ी का संचालन करता है। यहाँ तक कि सरकारी शव वाहन के लिए आवंटित ईंधन का उपयोग निजी वाहन में किए जाने की भी चर्चाएं हैं।
निगरानी तंत्र पर उठे सवाल वाहन में GPS सिस्टम लगा होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन और संबंधित विभाग की चुप्पी संदेहास्पद है। यदि लॉग-बुक और GPS की निष्पक्ष जांच की जाए, तो वाहन की वास्तविक लोकेशन और ईंधन खपत का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि इस पूरे खेल में ऊपर तक मिलीभगत है, जिसके कारण शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।









