Indore High Court Hearing : इंदौर। ऐतिहासिक और संवेदनशील धार भोजशाला मामले में इंदौर हाई कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गई है। करीब 4 साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद, कोर्ट ने 11 मई 2026 को सुनवाई का आखिरी दिन निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि इस तारीख के बाद माननीय न्यायालय अपना फैसला सुरक्षित रख सकता है।
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की रिपोर्ट को दी चुनौती आज हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें पेश की गईं और कोर्ट में रीजॉइंडर (प्रतिउत्तर) दाखिल किया गया। मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे चुनौती दी है। दलील में तर्क दिया गया कि भोजशाला परिसर वास्तव में ‘कमाल मौला मस्जिद’ है।
मूर्तियों और साक्ष्यों पर उठाए सवाल मुस्लिम पक्ष ने एएसआई द्वारा परिसर में मूर्तियां मिलने के दावे पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट में कहा गया कि जिन मूर्तियों को केमिकल से साफ कर पेश किया गया है, उनके साथ आधुनिक वस्तुएं जैसे सिगरेट और पानी की बोतलें भी मिली थीं। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि जब 11वीं शताब्दी में इन वस्तुओं का कोई अस्तित्व ही नहीं था, तो इनके साथ मूर्तियों का मिलना सर्वे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
4 साल के इंतजार के बाद फैसले की घड़ी उल्लेखनीय है कि इस मामले की सुनवाई 11 मई 2022 को इंदौर हाई कोर्ट में शुरू हुई थी। पिछले चार वर्षों में दोनों पक्षों—हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष और एएसआई—ने अपने-अपने दावे और प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। अब 11 मई 2026 को होने वाली अंतिम सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके बाद इस दशकों पुराने विवाद पर कानूनी मुहर लग सकती है।









