Job Crisis : जा सकती हैं 2 करोड़ भारतीयों की नौकरियां! जानिए क्यों गहराया मिडिल क्‍लास के लिए बड़ा संकट…

0
166
layoffs
layoffs

नई दिल्ली : भारत में मिडिल क्लास की नौकरियों पर आसन्न संकट तेजी से बढ़ रहा है। यह संकट आर्थिक मंदी की वजह से नहीं, बल्कि तकनीकी बदलाव, कंपनियों के नए ऑपरेशनल मॉडल और एआई अपनाने की रफ्तार की वजह से बन रहा है।मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने चेतावनी दी है कि अगर नीति निर्माता तुरंत कदम नहीं उठाते, तो आने वाले वर्षों में इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

व्हाइट-कॉलर नौकरियों का बड़ा हिस्सा हो सकता है खत्म
एक हालिया पॉडकास्ट में मुखर्जी ने भारत के व्हाइट-कॉलर जॉब मार्केट में चल रही उथल-पुथल पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि आईटी, बैंकिंग और मीडिया जैसे सेक्टरों में पारंपरिक मिडिल-क्लास नौकरियों की जगह गिग जॉब्स तेजी से ले रही हैं।
उनके अनुसार, “भारत को इस बदलाव का पूरा असर महसूस करने में दो से तीन साल लगेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में वेतनभोगी नौकरियां खत्म हो सकती हैं और भारत एक विशाल गिग इकोनॉमी में बदल सकता है।”गिग जॉब्स सिर्फ राइडशेयर या फूड डिलीवरी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कई पेशेवर भूमिकाएँ भी इस मॉडल में चली जाएँगी।

मानव श्रम की जगह तेजी से AI का वर्चस्व

मुखर्जी के मुताबिक, यह जॉब क्राइसिस मंदी का परिणाम नहीं है, बल्कि वह बदलाव है जिसे कंपनियाँ लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए लागू कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि बैंक, मीडिया हाउस और आईटी सर्विस कंपनियाँ व्यापक स्तर पर AI आधारित प्रक्रियाएँ अपनाने लगी हैं।

यहाँ तक कि विज्ञापन भी AI-जनित मॉडल और AI-निर्मित दृश्यों से बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “विज्ञापन में दिख रही मॉडल भी AI आधारित है… यहां तक कि दिखने वाला तोता भी असली नहीं है।”

घरेलू कर्ज का बढ़ता बोझ बढ़ा रहा है तनाव
भारत में घरेलू कर्ज भी इस तनाव को और गहरा कर रहा है।मुखर्जी के अनुसार, होम लोन को छोड़कर भारतीय परिवारों पर कुल कर्ज आय के 33–34% तक पहुंच चुका है, जो दुनिया में सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है।यह स्थिति उपभोग बढ़ाने के प्रयासों को मुश्किल बनाती है।

अमेरिका–भारत व्यापार तनाव और ट्रंप टैरिफ का खतरा
मुखर्जी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ वापस नहीं लिए गए, तो क्रिसमस तक 2 करोड़ भारतीय नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।उन्होंने कहा कि ₹2–5 लाख वार्षिक आय वाले कर्मचारियों की नौकरियाँ जाना अत्यंत चिंताजनक है।

टेक कंपनियों में छंटनी अब प्रदर्शन आधारित नहीं, बल्कि AI आधारित
2025 की वैश्विक टेक छंटनियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब छंटनियाँ खराब प्रदर्शन के कारण नहीं, बल्कि “AI क्या तेज़ी और सस्ते में कर सकता है” इस आधार पर हो रही हैं।कंपनियाँ पदानुक्रम कम कर रही हैं, और मिडिल मैनेजमेंट व एडमिन भूमिकाएँ एआई और ऑटोमेशन की वजह से दबाव में हैं।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here