निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पहलगाम हमले के जवाब में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है। DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने जानकारी दी कि SFDR तकनीक की सफलता के बाद लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल का तीसरा परीक्षण जल्द किया जाएगा। इसके साथ ही कई मौजूदा हथियार प्रणालियों को अपग्रेड करने पर तेजी से काम चल रहा है।
फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक से बढ़ेगी ताकत
DRDO ने हाल ही में फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग एयर-टू-एयर समेत कई आधुनिक मिसाइलों में किया जाएगा, जिससे उनकी रेंज और गति दोनों में बड़ा इजाफा होगा।
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ब्रह्मोस की रेंज 800 किमी तक बढ़ाने की तैयारी
DRDO फिलहाल ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। योजना के मुताबिक इसकी रेंज को बढ़ाकर करीब 800 किलोमीटर तक किया जाएगा। इससे भारतीय सशस्त्र बलों की स्ट्राइक क्षमता और रणनीतिक बढ़त मजबूत होगी।
हाइपरसोनिक मिसाइलों पर खास फोकस
संस्था का सबसे बड़ा ध्यान अब हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर है, जो ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा तेज चल सकती है। ऐसी मिसाइलें समुद्र, जमीन और हवा—तीनों मोर्चों पर दुश्मन को चकमा देने में सक्षम होंगी।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी मांग
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ी है। कई देशों ने इन्हें खरीदने में रुचि दिखाई है और जल्द नए निर्यात समझौतों की घोषणा संभव है। इससे भारत की रक्षा तकनीक की विश्वसनीयता और आर्थिक लाभ दोनों मजबूत होंगे।









