MBBS Course Duration Extension: MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव देशभर के मेडिकल छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एमबीबीएस कोर्स पूरा करने की अधिकतम समय सीमा को 9 साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो छात्रों को कोर्स पूरा करने के लिए पहले से अधिक समय मिलेगा।यह बदलाव उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो किसी कारण से निर्धारित समय में अपनी मेडिकल पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं।
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव के तहत छात्रों को एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के लिए प्रवेश की तारीख से अधिकतम 10 साल का समय दिया जा सकता है। इस अवधि में 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप भी शामिल रहेगी।इससे पहले संशोधित नियमों में यह अवधि 9 साल तय की गई थी, लेकिन अब आयोग फिर से इसे 10 साल करने पर विचार कर रहा है।
छात्रों को कैसे मिलेगा फायदा?
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आ सकता है जो स्वास्थ्य, पारिवारिक या अन्य कारणों से समय पर परीक्षा पास नहीं कर पाते।कई बार छात्रों को किसी विषय में बैक लग जाती है या पढ़ाई बीच में बाधित हो जाती है। ऐसे में अतिरिक्त समय मिलने से उन्हें कोर्स पूरा करने का बेहतर अवसर मिल सकता है।
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फर्स्ट ईयर परीक्षा नियमों में कोई बदलाव नहीं
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव के बावजूद प्रथम वर्ष की परीक्षा से जुड़े नियमों में फिलहाल कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।मौजूदा नियमों के अनुसार छात्रों को फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार अवसर मिलते रहेंगे। यानी पहले वर्ष की परीक्षा में सफलता के लिए निर्धारित प्रयासों की सीमा यथावत रहेगी।
NMC ने मांगे सुझाव और आपत्तियां
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने से पहले NMC ने सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। मेडिकल छात्रों, कॉलेजों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों को अपनी राय देने का अवसर दिया गया है।आयोग ने इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया भेजने के लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया है। इसके बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा की जाएगी।
कैसे बनते हैं डॉक्टर?
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव को समझने के लिए मेडिकल शिक्षा की वर्तमान प्रक्रिया को जानना भी जरूरी है। भारत में डॉक्टर बनने की शुरुआत NEET UG परीक्षा से होती है।इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीट मिलती है। इसके बाद 4.5 वर्ष की अकादमिक पढ़ाई और 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होती है।
कई छात्र तय समय में पूरा नहीं कर पाते कोर्स
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हर साल कुछ छात्र निर्धारित अवधि में कोर्स पूरा नहीं कर पाते।कई मामलों में परीक्षा में असफलता, स्वास्थ्य समस्याएं या अन्य व्यक्तिगत कारणों से पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे छात्रों को कोर्स पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ती है।
मेडिकल शिक्षा पर क्या होगा असर?
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव लागू होने पर मेडिकल शिक्षा प्रणाली में कुछ व्यावहारिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों पर समय सीमा का दबाव कम होगा।हालांकि कुछ शिक्षा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लंबी समय सीमा का प्रभाव शैक्षणिक अनुशासन पर भी पड़ सकता है। इसलिए आयोग सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही अंतिम निर्णय करेगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
MBBS पढ़ाई अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव अभी केवल सुझाव के रूप में सामने आया है और इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। NMC द्वारा प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद ही नए नियम को लागू करने या उसमें बदलाव करने पर निर्णय लिया जाएगा।फिलहाल मेडिकल छात्रों और शिक्षण संस्थानों की नजर इस प्रस्ताव पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर देशभर में MBBS की पढ़ाई कर रहे हजारों विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।









