रायपुर : देशभर में बुजुर्गों की जीवनभर की जमा-पूंजी पर डाका डालने वाले ‘डिजिटल अरेस्टर’ सिंडिकेट्स के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। लोकसभा में दिए गए विस्तृत जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि इन संगठित साइबर गिरोहों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यह बयान दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में सामने आए उस चौंकाने वाले मामले के बाद आया, जहां एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपत्ति को करीब दो सप्ताह तक “डिजिटल कस्टडी” में रखकर ₹14.85 करोड़ की ठगी की गई।
कैसे काम करता है डिजिटल अरेस्ट का जाल
सरकारी जानकारी के अनुसार, ये गिरोह खुद को TRAI, CBI या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखते हैं। पीड़ितों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर RTGS के जरिए रकम अलग-अलग राज्यों में बने म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर करवाई जाती है।
Brij Mohan Agarwal Press Relese
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की बड़ी पहल
लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस गंभीर मुद्दे पर सदन में प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा के लिए सिंगापुर मॉडल अपनाने की वकालत की। उन्होंने ‘Money Lock’ या ‘Security Latch’ फीचर को बड़े खातों के लिए अनिवार्य करने की मांग की, जिससे बिना भौतिक सत्यापन के बड़ी रकम ट्रांसफर न हो सके। अग्रवाल ने कहा कि वे इस विषय पर केंद्रीय वित्त मंत्री और RBI गवर्नर से सीधे चर्चा करेंगे।
Read More : CG News: छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल, 307 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति जारी
सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश
डिजिटल ठगी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए करीब ₹3,000 करोड़ की देशव्यापी ठगी को “चौंकाने वाला” बताया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि ऐसे अपराधियों से “लोहे के हाथों” से निपटा जाएगा और फर्जी कानूनी आदेशों के जरिए डर फैलाने को न्याय व्यवस्था पर हमला बताया।
सरकार की अपील: सतर्क रहें
गृह मंत्रालय ने नागरिकों से “Stop, Think, Act” अपनाने की अपील की है। अब तक I4C द्वारा 60,000 से अधिक फर्जी आईडी ब्लॉक की जा चुकी हैं। संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर देने को कहा गया है।









