धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पूजा और नमाज दोनों होगी, प्रशासन को दिए कड़े निर्देश

Rahul Goshwami
Supreme Court

धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे समय से चले आ रहे पूजा और नमाज विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुना दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि बेहतर होगा कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था करे, जिससे दोनों समुदायों के लोग अपनी-अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा और नमाज अदा कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने की सुनवाई

भोजशाला विवाद पर सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) पेश हुए, जबकि मस्जिद कमेटी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और याचिकाकर्ता की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने पक्ष रखा।

Read More : भोपाल में प्रदूषण घटाने की बड़ी पहल, सड़कों पर उतरेंगी 15 ईवी स्वीपिंग मशीनें

पूजा और नमाज दोनों के लिए तय होगी व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बसंत पंचमी के दिन पूजा और नमाज दोनों की अनुमति होगी। अदालत ने निर्देश दिया कि

  • नमाज के लिए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का समय तय किया जाए

  • नमाज के लिए मंदिर परिसर में ही अलग स्थान निर्धारित किया जाए

  • नमाजियों के लिए विशेष पास और अलग प्रवेश-निकास मार्ग होगा

  • बसंत पंचमी की पूजा के लिए अलग स्थान तय होगा, लेकिन पूजा के समय पर कोई सीमा नहीं होगी

  • कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की जाएगी

सुनवाई के दौरान क्या दलीलें दी गईं

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से ASG ने कहा कि इस मामले की मूल याचिका पहले ही अप्रभावी हो चुकी है। वहीं, सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि इससे पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है और तब ASI ने तीन घंटे की पूजा की अनुमति दी थी।
ASI के वकील ने कोर्ट को बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक रहता है और इस अवधि में पूजा की अनुमति दी जा सकती है। दूसरी ओर, विष्णु शंकर जैन ने कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला

यह याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई थी, जिसमें 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के दिन नमाज पर रोक और केवल मां सरस्वती की पूजा की अनुमति की मांग की गई थी।

भोजशाला विवाद का इतिहास

धार स्थित भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है। इतिहासकार इसे राजा भोज द्वारा स्थापित ज्ञान और शिक्षा का केंद्र मानते हैं, जहां मां सरस्वती की उपासना होती थी। वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है।
साल 2003 से यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था है। 2024 में हाई कोर्ट के आदेश पर ASI ने वैज्ञानिक सर्वे किया, जिसमें मंदिर के अवशेष मिलने की बात सामने आई, हालांकि अंतिम फैसला अभी न्यायालय के अधीन है।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *