Chhattisgarh liquor supply crisis : छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग द्वारा बिना पर्याप्त तैयारी के शराब को प्लास्टिक बोतलों में बेचने के फैसले ने पूरे राज्य की सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। प्रदेश की 800 से अधिक दुकानों में शराब की आपूर्ति मांग के मुकाबले बेहद कम हो गई है।
15 दिनों में 500 करोड़ का नुकसान
आंकड़ों के अनुसार, बीते 15 दिनों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की सप्लाई प्रभावित होने से लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। दुकानों में स्टॉक खत्म होने से बिक्री पर भी बड़ा असर पड़ा है।
महंगी शराब की मांग में भारी उछाल
किफायती शराब की कमी के चलते राज्य में महंगी अंग्रेजी शराब और बीयर की मांग में लगभग 50% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई दुकानों पर काउंटर कुछ ही घंटों में खाली हो जा रहे हैं।
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उत्पादन और बॉटलिंग में बाधा
प्लास्टिक बोतल नीति के बाद डिस्टिलरियों और बॉटलर्स को अचानक बदलाव करना पड़ा, जिससे उत्पादन कई दिनों तक ठप रहा। कांच की बोतलों में फिर से बॉटलिंग के आदेश ने स्थिति और जटिल कर दी।
सप्लाई आधी से भी कम
राज्य की 800 से ज्यादा दुकानों को रोज की जरूरत के मुकाबले सिर्फ एक-तिहाई शराब मिल पा रही है। बिलासपुर जैसे जिलों में स्थिति और गंभीर है, जहां मांग और सप्लाई में बड़ा अंतर है।
रोजाना 40-50 करोड़ का राजस्व नुकसान
सामान्य दिनों में राज्य में रोजाना लगभग 70 करोड़ रुपये की शराब बिक्री होती है। सप्लाई बाधित होने से सरकार को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
प्लास्टिक बोतल सिस्टम पर सवाल
डिस्टिलरियों के अनुसार प्लास्टिक बोतल सिस्टम के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। नए सेटअप लगाने में करोड़ों रुपये और समय दोनों लग रहे हैं।
कच्चे माल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से प्लास्टिक रॉ-मटेरियल की कीमतें 40% से 70% तक बढ़ गई हैं, जिससे उत्पादन लागत भी बढ़ी है।
सरकार का दावा
आबकारी मंत्री ने कहा है कि यह शुरुआती व्यवस्था है और जल्द ही सप्लाई सामान्य हो जाएगी। उनके अनुसार नई प्रणाली से मिलावटखोरी पर रोक लगेगी और व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।









