Chhattisgarh Assembly News : ऐसा रहा नए विधानसभा भवन में पहला शीतकालीन सत्र, पहले दिन कई मुद्दों पर बहस, गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत रविवार से नवा रायपुर स्थित नवनिर्मित विधानसभा भवन में हुई। यह इस अत्याधुनिक भवन में आयोजित होने वाला पहला सत्र है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष खासा उत्साहित नजर आया। हालांकि पहले ही दिन सियासी माहौल गरमा गया, जब कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। कांग्रेस के बहिष्कार के बीच सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

सदन में ‘विजन 2047’ पर विस्तार से चर्चा
सत्र के पहले दिन सदन में ‘विजन 2047’ विषय पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि विजन 2047 छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी रोडमैप है। उन्होंने बताया कि इस विजन डॉक्यूमेंट को समाज के हर वर्ग से मिले सुझावों और विचारों के आधार पर तैयार किया गया है। सरकार का उद्देश्य वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को आर्थिक, सामाजिक और आधारभूत ढांचे के स्तर पर अग्रणी राज्यों में शामिल करना है।

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नई प्रक्रिया की शुरुआत : अजय चंद्राकर
पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि आज विधानसभा में एक नई प्रक्रिया की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि सदन में किस मुद्दे पर चर्चा होगी, बहस का स्वरूप क्या होगा और सवाल-जवाब की प्रक्रिया कैसे चलेगी, इस पर भी स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम बताया।

JNU में नारेबाजी का मुद्दा सदन में उठा
सदन में भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में नक्सली कमांडर हिड़मा के समर्थन में लगाए गए नारों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य देशविरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं और इसकी कड़ी आलोचना होनी चाहिए। धर्मजीत सिंह ने इस संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग भी की।

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नक्सल समर्थकों को बस्तर भेजने की मांग
विधायक धर्मजीत सिंह ने सुझाव दिया कि जो लोग नक्सलियों का समर्थन करते हैं, उन्हें बस्तर क्षेत्र का भ्रमण कराया जाना चाहिए, ताकि वे नक्सल हिंसा की सच्चाई और वहां के लोगों पर हुए अत्याचारों को समझ सकें। उन्होंने नक्सली हिड़मा और बसवराजू की क्रूर गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

विधायक निधि बढ़ाने की भी उठी आवाज
धर्मजीत सिंह ने सदन में विधायक निधि को 10 करोड़ रुपये किए जाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने विधायक निधि में वृद्धि की थी और अब मुख्यमंत्री को भी विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि बढ़ी हुई विधायक निधि से क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

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