CG NEWS: जिंदल पावर की राख ने छिना कुंजेमुरा का चैन ; कलेक्टर के कड़े तेवर, क्या अब थमेगा प्रदूषण का ये ‘तांडव’

Sanjay Sahu
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CG NEWS: गौरीशंकर गुप्ता/तमनार/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में स्थित जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के थर्मल पावर प्लांट की ऐश डाइक से उड़ रही फ्लाई ऐश ने आसपास के ग्रामीणों का जीवन नरक बना दिया है। कुंजेमुरा सहित दर्जन भर गांवों के निवासी लगातार शिकायत कर रहे हैं कि प्लांट से निकलने वाली राख हवा में उड़कर उनके घरों, खेतों और सांसों में घुस रही है। इससे फसलें बर्बाद हो रही हैं, भूजल दूषित हो रहा है और सांस व त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।

CG NEWS: ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में समस्या और विकराल हो जाती है, जहां राख का तांडव सब कुछ सफेद परत में लपेट देता है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि ऐश डाइक पर तत्काल कंट्रोल उपाय किए जाएं, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी है।

CG NEWS: कलेक्टर के सख्त निर्देश

CG NEWS: जिला कलेक्टर ने हाल ही में 2 मार्च 2026 को इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए जिंदल पावर प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। उन्होंने ऐश डाइक से राख उड़ने को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के आदेश दिए हैं, जिसमें वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम स्थापित करना, ग्रीन बेल्ट विकसित करना और राख डंपिंग पर नियंत्रण शामिल है।

CG NEWS: कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि पर्यावरण मानकों का उल्लंघन जारी रहा तो जुर्माना लगाया जाएगा और संचालन रोकने जैसी कार्रवाई हो सकती है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) को जांच सौंपी गई है, जो जल्द रिपोर्ट सौंपेगा। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पिछले आदेशों की याद दिलाती है, जहां जिंदल समूह पर कोयला खदानों में प्रदूषण के लिए 160 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायतों पर जिंदल अधिकारियों के साथ बैठक भी बुलाई है।

CG NEWS: प्रदूषण का लंबा इतिहास

CG NEWS: तमनार क्षेत्र जिंदल पावर प्लांट के कारण वर्षों से प्रदूषण का शिकार है। NGT ने 2020 में गारे IV-2/3 कोयला खदानों में पर्यावरण उल्लंघन पाए, जिसमें वायु प्रदूषण, भूजल क्षति और स्वास्थ्य हानि शामिल थी। फ्लाई ऐश डंपिंग से प्रभावित गांवों जैसे कोसमपल्ली, सरसमल और कुंजेमुरा में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।

CG NEWS: जिंदल ने पत्र लिखकर जनसुनवाई रद्द करने की मांग की थी, लेकिन प्रदूषण मुद्दा बार-बार उभर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐश डाइक का खुला होना हवा से राख फैलाने का मुख्य कारण है। प्रशासन अब मुआवजा, स्वास्थ्य सुविधाएं और बहाली योजना पर काम कर रहा है। कलेक्टर के इन कड़े तेवरों से ग्रामीण उम्मीद बंधी है कि प्रदूषण का तांडव थमेगा। लेकिन क्या जिंदल प्रबंधन निर्देश मानेंगे या मामला कोर्ट पहुंचेगा? स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि सतत निगरानी जरूरी है।

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