TMC में बड़ी टूट की आहट? 50 से ज्यादा विधायकों के दावे ने बढ़ाई ममता बनर्जी की टेंशन

TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस संकट चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। पार्टी से बाहर किए गए नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताने की तैयारी कर रहे हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।

बताया जा रहा है कि कुछ विधायक विधानसभा स्पीकर के सामने अपनी ताकत दिखाने की योजना बना सकते हैं। हालांकि अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस संकट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस संकट तब और गहरा गया जब दावा किया गया कि पार्टी के कई विधायक मौजूदा नेतृत्व से नाराज हैं। आरोप है कि कुछ विधायक पार्टी के फैसलों और संगठन की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं।दावा यह भी किया गया कि असंतुष्ट समूह खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन सकता है।

नए गुट के सामने क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस संकट के बीच किसी भी नए गुट को मान्यता पाने के लिए पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन दिखाना होगा।वर्तमान स्थिति में विधानसभा में TMC के 80 विधायक हैं। नियमों के अनुसार किसी बड़े विभाजन को मान्यता दिलाने के लिए दो-तिहाई समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यानी 54 विधायकों का साथ होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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BJP ने क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस संकट पर भाजपा ने साफ कहा है कि उसकी प्राथमिकता अपने संगठन को मजबूत करना है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी बाहरी नेताओं को शामिल करने की राजनीति नहीं कर रही है।इस बयान के बाद यह अटकलें कुछ कमजोर जरूर हुई हैं कि कोई बड़ा समूह सीधे भाजपा का दामन थाम सकता है।

TMC का जवाब भी आया सामने
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस संकट पर TMC नेताओं ने दावा किया है कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं। पार्टी का कहना है कि विपक्ष और विरोधी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।वरिष्ठ नेताओं ने भरोसा जताया है कि संगठन और जनाधार दोनों पर पार्टी का नियंत्रण मजबूत बना हुआ है।

पिछले कुछ दिनों में क्यों बढ़ी हलचल?
तृणमूल कांग्रेस संकट की चर्चा पिछले कुछ दिनों में कई घटनाओं के बाद तेज हुई है। पार्टी बैठकों में अपेक्षा से कम विधायकों की मौजूदगी, कुछ नेताओं की नाराजगी और संगठन के भीतर उठे सवालों ने अटकलों को हवा दी है।इसके अलावा कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से पार्टी के निर्णयों पर सवाल उठाने से भी राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

कानून क्या कहता है?
तृणमूल कांग्रेस संकट की स्थिति में दलबदल कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी बड़े राजनीतिक विभाजन की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग की भूमिका अहम हो जाती है।यह देखा जाता है कि चुने हुए प्रतिनिधियों, पार्टी संगठन और अधिकृत पदाधिकारियों का समर्थन किस पक्ष के साथ है। अंतिम फैसला संवैधानिक नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही होता है।

आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस संकट को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन वास्तविक तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ होगी। यदि असंतुष्ट विधायक खुलकर सामने आते हैं तो बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।वहीं यदि पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं को मनाने में सफल रहता है, तो यह संकट टल भी सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर TMC के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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