Thursday, September 10, 2026
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Singrauli News: सोन घड़ियाल अभ्यारण में अवैध रेत उत्खनन का बड़ा खेल; घड़ियाल-मगरमच्छों के अस्तित्व पर मंडराया संकट

Singrauli News; सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला अंतर्गत चितरंगी विकासखंड में स्थित प्रसिद्ध ‘सोन घड़ियाल अभ्यारण’ इन दिनों एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक और पर्यावरणीय विवादों के घेरे में आ गया है। अभ्यारण क्षेत्र से होकर गुजरने वाली जीवनदायिनी सोन नदी में रेत का कथित अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण का काला कारोबार बड़े पैमाने पर संचालित होने की खबरें सामने आ रही हैं। सबसे चिंताजनक और गंभीर आरोप स्थानीय स्तर पर यह लगाए जा रहे हैं कि यह पूरा गैर-कानूनी खेल अभ्यारण प्रबंधन और वन विभाग के ही कुछ जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की कथित ‘संरक्षण छाया’ और मिलीभगत से फल-फूल रहा है।

अंधेरे का फायदा उठाकर दौड़ रहे दर्जनों ट्रैक्टर, ‘तय राशि’ की वसूली की चर्चा

स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रेत माफियाओं द्वारा सोन नदी के विभिन्न प्रतिबंधित हिस्सों से रात के अंधेरे में दर्जनों ट्रैक्टरों के माध्यम से धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी शिकायतों का दबाव बढ़ता है, तो विभागीय अमला महज कुछ छोटे-मोटे लोगों पर कार्रवाई कर सख्ती का दिखावा करता है, जबकि क्षेत्र के बड़े और रसूखदार रेत कारोबारी बिना किसी डर के अपना कारोबार निर्बाध रूप से चला रहे हैं। समूचे क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि अभ्यारण क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले प्रति ट्रैक्टर से प्रति रात्रि एक ‘तय राशि’ की अवैध वसूली की जाती है। हालांकि इन गंभीर आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवाल सीधे तौर पर विभागीय कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

प्रजनन काल में भारी वाहनों की आवाजाही; अंडों के नष्ट होने का बढ़ा खतरा

पर्यावरणविदों और जीव विज्ञान के जानकारों का कहना है कि जून का यह महीना घड़ियालों और मगरमच्छों के लिए बेहद संवेदनशील और उनका मुख्य प्रजनन काल (Breeding Season) होता है। इस खास मौसम में मादा घड़ियाल और मगरमच्छ नदी के शांत किनारों पर मौजूद रेतीली सतह पर अपने अंडे देते हैं। ऐसे में यदि अभ्यारण की प्रतिबंधित सीमा के भीतर भारी वाहनों और ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही और भारी उत्खनन जारी रहता है, तो इन दुर्लभ जल प्राणियों के प्राकृतिक आवास और संपूर्ण प्रजनन चक्र पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध उत्खनन पर तुरंत प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो यह इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता (Biodiversity) के लिए एक अपूरणीय और विनाशकारी खतरा साबित हो सकता है।

बगदरा और बीछी क्षेत्र में ‘नियमित हिसाब-किताब’ के तहत चल रहा परिवहन

सोन नदी से जुड़े बगदरा और बीछी क्षेत्रों में भी अवैध रेत के कारोबार को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि बगदरा चौकी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले अवैध रेत से लदे वाहनों के लिए एक ‘विशेष तय व्यवस्था’ बनाई गई है। प्रत्येक वाहन से कथित तौर पर नियमित हिसाब-किताब तय होने के कारण रेत कारोबारी बेखौफ होकर सड़कों पर गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीछी क्षेत्र की सोन नदी से बड़े पैमाने पर निकाली जा रही रेत को बगदरा क्षेत्र में लाकर डंप (भंडारण) किया जा रहा है और यह गोरखधंधा पिछले कई महीनों से लगातार जारी है। इस संबंध में स्थानीय नागरिकों द्वारा पूर्व में भी जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों तक लिखित शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। क्षेत्र की जनता ने अब इस पूरे मामले की किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराकर दोषी अधिकारियों और कारोबारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

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