US House Hinduphobia: नई दिल्ली; 02 जून 2026। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) की राजनीति और वहां रह रहे भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। अमेरिका के विकास, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के बेजोड़ योगदान को आधिकारिक मान्यता देने तथा उनके खिलाफ बढ़ते ‘हिंदूफोबिया’ (Hinduphobia), हिंदू-विरोधी कट्टरता और पूजा स्थलों (मंदिरों) पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा करने के लिए अमेरिकी संसद के निचले सदन ‘प्रतिनिधि सभा’ (House of Representatives) में एक विशेष प्रस्ताव लाया गया है। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अब तक विभिन्न अमेरिकी राजनीतिक दलों के 32 प्रभावशाली सांसदों का पुरजोर समर्थन मिल चुका है, जिससे अमेरिकी धरती पर हिंदू समुदाय की सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है।
सांसद श्री थानेदार ने पेश किया प्रस्ताव, रो खन्ना समेत दिग्गजों ने किया समर्थन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को सबसे पहले मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद श्री थानेदार द्वारा संसद के पटल पर रखा गया था। इस सिलसिले में सोमवार (1 जून) को भारतीय मूल के ही एक अन्य बेहद लोकप्रिय और वरिष्ठ अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी आधिकारिक रूप से इस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन करने की घोषणा की। रो खन्ना ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका की प्रगति में हिंदू-अमेरिकी समुदाय का योगदान अद्वितीय और बेहद महत्वपूर्ण है, जिसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव पहली बार 24 जनवरी 2025 को अमेरिकी संसद में पेश किया गया था, जिसे अब व्यापक राजनीतिक समर्थन हासिल हो रहा है।
राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम भी सह-प्रायोजक; भेदभाव के खिलाफ कड़ा संदेश
इस प्रस्ताव को अमेरिकी संसद की मंजूरी दिलाने के लिए भारतीय मूल के अन्य जाने-माने सांसद जैसे राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम भी मजबूती से आगे आए हैं और वे इस प्रस्ताव के प्रमुख सह-प्रायोजकों (Co-sponsors) में शामिल हैं। प्रस्ताव के मसौदे में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि पिछले कुछ समय में अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में हिंदू समुदाय और उनके पवित्र पूजा स्थलों को नफरत व हिंसा का शिकार बनाया गया है। प्रस्ताव में दोटूक शब्दों में कहा गया है कि अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक और बहुसांस्कृतिक देश की प्रगति में हिंदू समुदाय ने विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग और समाज सेवा जैसे हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है।![]()
प्रस्ताव में अमेरिकी सरकार और समाज को यह कड़ा संदेश देने का प्रयास किया गया है कि देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में बड़ी भूमिका निभाने वाले इस शांतिप्रिय समुदाय के खिलाफ किसी भी तरह की नफरत, पूर्वाग्रह, कट्टरता या भेदभाव को किसी भी कीमत पर स्वीकार या बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन के बाद यह प्रस्ताव जल्द ही पारित हो सकता है, जो वैश्विक मंच पर हिंदू समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।









