MP Teacher Attendance: भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर सदन में जोरदार बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता, डेटा सुरक्षा और तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस विधायक सुनील उइके ने सवाल किया कि जब प्रदेशभर के लाखों शिक्षकों का व्यक्तिगत डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा और डेटा लीक होने की स्थिति में सरकार क्या जवाबदेही तय करेगी?
इस मुद्दे पर स्कूल शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रणाली के लागू होने से स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई है और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ी है।
कांग्रेस ने उठाए डेटा सुरक्षा और तकनीकी दिक्कतों पर सवाल
सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक सुनील उइके ने कहा कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शिक्षकों की व्यक्तिगत जानकारी और लोकेशन डेटा किस प्रकार सुरक्षित रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क की समस्या के कारण शिक्षक समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके वेतन और सेवा संबंधी मामलों पर भी असर पड़ सकता है।उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों को परेशान नहीं होना पड़ेगा और क्या सरकार डेटा सुरक्षा की पूरी गारंटी देती है?
विश्वास सारंग बोले- ई-अटेंडेंस से आई पारदर्शिता, डेटा पूरी तरह सुरक्षित
MP Teacher Attendance: स्कूल शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग सभी सरकारी स्कूलों में यह प्रणाली सुचारु रूप से संचालित हो रही है।
मंत्री ने बताया कि केवल करीब 4 प्रतिशत क्षेत्रों में नेटवर्क संबंधी तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं, जबकि शेष प्रदेश में ई-अटेंडेंस सिस्टम बिना किसी बाधा के काम कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिस्टम में दर्ज होने वाला डेटा पूरी तरह सुरक्षित है और उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं की गई हैं।
1 जुलाई से प्रदेशभर में अनिवार्य हुई ई-अटेंडेंस व्यवस्था
गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई 2026 से प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों, प्राचार्यों और विभागीय अधिकारियों के लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और फर्जी उपस्थिति जैसी शिकायतों पर रोक लगाना है।हालांकि, विभाग के पास यह जानकारी भी पहुंची है कि कई शिक्षक अभी भी निर्धारित नियमों के अनुसार नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं।
90 प्रतिशत उपस्थिति नहीं होने पर निलंबन की खबरों पर विभाग ने दी सफाई
MP Teacher Attendance: ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हुई कि 90 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले शिक्षकों को सीधे निलंबित कर दिया जाएगा।इस पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। विभाग ने साफ किया कि कम उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों को सीधे निलंबित करने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
वेतन जारी करने में लापरवाही पर संकुल प्राचार्य होंगे जिम्मेदार
डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक की उपस्थिति निर्धारित मानक से कम होने के बावजूद उसका पूरा वेतन जारी किया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित संकुल प्राचार्य की होगी।विभाग के अनुसार, ऐसे मामलों में सबसे पहले संबंधित प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कम उपस्थिति वाले शिक्षकों के वेतन में नियमानुसार आनुपातिक कटौती करना अनिवार्य होगा।
ई-अटेंडेंस को लेकर सियासत तेज
MP Teacher Attendance: विधानसभा में ई-अटेंडेंस को लेकर हुई बहस के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गर्मा गया है। सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला बड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि जब तक तकनीकी समस्याओं का समाधान और डेटा सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था नहीं होगी, तब तक इस प्रणाली को लेकर शिक्षकों की चिंताएं बनी रहेंगी।अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार ई-अटेंडेंस से जुड़ी तकनीकी समस्याओं और शिक्षकों की शिकायतों के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाती है।







