Dead in Records: सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा बुजुर्ग को कर दिया मृत घोषित, हक और पहचान वापस पाने कलेक्ट्रेट पहुंचा 60 वर्षीय व्यक्ति अपर बैड

Anuj Nirala

Dead in Records: हरदा। जिले में सरकारी रिकॉर्ड की एक गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक 60 वर्षीय बुजुर्ग को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं। हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उनका नाम विभिन्न शासकीय पोर्टलों और दस्तावेजों से हटा दिया गया, जिससे वे सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हो गए।

Dead in Records: अपनी पहचान और अधिकार वापस पाने के लिए बुजुर्ग को प्रशासन के दरवाजे खटखटाने पड़े। मंगलवार को हरदा कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे अहलवाड़ा निवासी करण सिंह ने अधिकारियों को आवेदन सौंपकर अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने कहा कि वे जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शा दिया गया है, जिसके कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

READ MORE: Jabalpur Fraud Case: किडनी बेचने और लोन दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, परेशान भाई-बहन न्याय की गुहार लेकर पहुंचे एसपी ऑफिस अपर बैड

Dead in Records: करण सिंह ने बताया कि रिकॉर्ड में हुई इस गलती का असर उनके दैनिक जीवन पर भी पड़ रहा है। कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है। इसके अलावा विभिन्न सरकारी पोर्टलों और दस्तावेजों में उनका नाम दिखाई नहीं दे रहा, जिससे जरूरी काम भी अटक गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अपने जीवित होने के प्रमाण, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक कागजात प्रस्तुत करते हुए रिकॉर्ड में सुधार की मांग की।

Dead in Records: बुजुर्ग का कहना है कि एक प्रशासनिक गलती ने उन्हें कागजों में मृत बना दिया है, जबकि वे पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द रिकॉर्ड दुरुस्त करने की मांग की ताकि वे दोबारा सरकारी योजनाओं, पेंशन और अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

Dead in Records: मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा यदि रिकॉर्ड में त्रुटि पाई जाती है तो उसे तत्काल सुधारा जाएगा।

READ MORE: Twisha Sharma केस में कोर्ट का बड़ा फैसला!समर्थ और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

Dead in Records: यह मामला एक बार फिर सरकारी रिकॉर्ड और डेटा प्रबंधन में होने वाली त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। एक छोटी सी गलती किसी व्यक्ति के अधिकार, पहचान और सरकारी सुविधाओं पर कितना बड़ा असर डाल सकती है, इसका उदाहरण हरदा का यह मामला बन गया है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *