Sunday, August 23, 2026
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CG NEWS : घरघोड़ा में 15 दिन में 19 “डॉग बाइट” केस! क्या पालतू कुत्तों के मालिक मान रहे हैं Supreme Court of India की गाइडलाइन?

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CG NEWS : घरघोड़ा (रायगढ़, छत्तीसगढ़)।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घरघोड़ा में पिछले मात्र 15 दिनों में कुत्ते के काटने के 19 मामले दर्ज हुए हैं। आंकड़ा छोटा नहीं है, पर जिम्मेदारी शायद अभी भी “कुत्ते की पूंछ” की तरह टेढ़ी ही है।

CG NEWS : नगर में सवाल घूम रहा है

क्या पालतू कुत्ते रखने वाले मालिक सच में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं, या फिर “मेरा कुत्ता तो बहुत सीधा है” कहकर जिम्मेदारी से सीधा मुंह मोड़ रहे हैं?

🦴 गाइडलाइन क्या कहती है?

Supreme Court of India और पशु कल्याण संबंधी नियमों के अनुसार:
पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
रेबीज टीकाकरण (Anti-Rabies Vaccination) अनिवार्य है।
सार्वजनिक स्थानों पर लीश (पट्टा) लगाना चाहिए।
किसी को नुकसान होने पर मालिक जिम्मेदार होता है।
पर जमीनी हकीकत?
कुत्ता खुला घूमे, मालिक मोबाइल में व्यस्त… और जिम्मेदारी हवा में व्यस्त।
🦠 क्या है रैबिज?
रैबिज (Rabies) एक जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित कुत्ते, बंदर या अन्य जानवर के काटने/खरोंचने से फैलती है।
यह वायरस सीधे तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर हमला करता है।
⚠️ नुकसान क्या है?
तेज बुखार
घाव के पास झनझनाहट
पानी से डर (Hydrophobia)
बेचैनी, मानसिक भ्रम
इलाज न मिले तो लगभग 100% मृत्यु दर
मतलब साफ है—
“कुत्ते ने थोड़ा सा ही काटा है” वाली लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
💉 इलाज क्या है?
✔️ काटने के तुरंत बाद 15 मिनट तक साबुन-पानी से घाव धोएं
✔️ तुरंत अस्पताल जाकर Anti-Rabies Vaccine लगवाएं
✔️ गंभीर मामलों में Rabies Immunoglobulin (RIG) भी दिया जाता है
✔️ पूरा वैक्सीनेशन कोर्स पूरा करना अनिवार्य
देरी = खतरा।

📰 व्यंग्य की नजर से…

घरघोड़ा में कुत्तों का “आत्मविश्वास” बढ़ता जा रहा है और इंसानों का “धैर्य” घटता जा रहा है।
मालिक कहते हैं—
“हमारा डॉगी तो घर का सदस्य है।”
पर जब वही सदस्य किसी राहगीर को काट ले, तो जिम्मेदारी किसकी सदस्य बनती है?
क्या नगर में कुत्ते ज्यादा जागरूक हैं या इंसान कम?
15 दिन में 19 केस यह बता रहे हैं कि समस्या “भौंक” से आगे बढ़कर “काट” तक पहुंच चुकी है।
🚨 प्रशासन से सवाल
क्या सभी पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन हुआ है?
क्या टीकाकरण की जांच हो रही है?
क्या आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान प्रभावी है?
जब तक जवाब नहीं मिलेगा, तब तक “डॉग बाइट” का काउंटर शायद ऐसे ही बढ़ता रहेगा।

CG NEWS : निष्कर्ष:

रैबिज मजाक नहीं है।
कुत्ता पालना शौक हो सकता है, पर जिम्मेदारी भी साथ में पालनी पड़ेगी।
वरना अस्पताल की पर्ची और इंजेक्शन की सुई याद दिलाती रहेगी कि लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है।

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