Sunday, August 23, 2026
Home National Cash scandal : जज यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार,...

Cash scandal : जज यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, अदालत ने कहा – रिपोर्ट पर आपत्ति थी तो पहले क्यों नहीं पहुंचे कोर्ट…

nishaanebaz.com (22)
nishaanebaz.com (22)

Cash scandal : दिल्ली। देश की न्यायपालिका को हिला देने वाले कथित कैश कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें जांच रिपोर्ट या समिति के गठन पर आपत्ति थी, तो वे उसी समय अदालत क्यों नहीं पहुंचे। अदालत ने उनकी याचिका को अस्वीकार्य करार देते हुए कहा कि जब तक वह जांच समिति की पूरी रिपोर्ट को रिकॉर्ड में संलग्न नहीं करते, तब तक सुनवाई नहीं हो सकती।

जस्टिस यशवंत वर्मा पर आरोप है कि उनके सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में नकद राशि बरामद हुई थी। इस मामले में एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट में उन्हें दोषी ठहराया है। रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने उनकी तत्काल पद से हटाने की सिफारिश की थी।

जस्टिस वर्मा ने इस रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और समिति के गठन पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि समिति का गठन संविधान और जजेस इन्क्वायरी एक्ट के प्रावधानों के तहत नहीं हुआ।

nishaanebaz.com (22)
nishaanebaz.com (22)

Cash scandal : सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस दीपांकर दत्ता ने याचिकाकर्ता से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा:

“अगर जांच कमेटी या रिपोर्ट पर कोई आपत्ति थी, तो उसी समय अदालत क्यों नहीं आए? आप चीफ जस्टिस की चिट्ठी का जिक्र कर रहे हैं, लेकिन उसे रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया है। इस स्थिति में हम याचिका पर सुनवाई कैसे करें?”

अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि वे रिपोर्ट को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजे जाने पर आपत्ति कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख हैं और न्यायाधीशों की नियुक्ति जैसे मामलों में उनकी भूमिका स्पष्ट है।

Read More : नागपंचमी 2025 : 44 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, ये उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत

कपिल सिब्बल की दलीलें
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो जस्टिस वर्मा की ओर से पेश हुए, ने तर्क दिया कि:

इस मामले में जिस प्रकार से रिपोर्ट तैयार की गई और उसे लीक किया गया, उससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

वीडियो को पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया, और मीडिया ट्रायल शुरू हो गया।

समिति का गठन अनुच्छेद 124 की प्रक्रिया का उल्लंघन है, क्योंकि जजों को हटाने का अधिकार केवल संसद को है।

उन्होंने यह भी कहा कि अदालत चाहे तो सुनवाई को स्थगित करे या पहले उन कानूनी बिंदुओं पर बहस कर ले जिन्हें वे उठाना चाहते हैं।

Read More : Bhind News : सिंध नदी में जलस्तर बढ़ने से डूबा राम-जानकी मंदिर, तेज बहाव में फंसे पुजारी को SDRF ने किया रेस्क्यू

रिपोर्ट और सबूत की मांग
अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे समिति की रिपोर्ट को याचिका के साथ प्रस्तुत करें। अदालत का कहना है कि रिपोर्ट के अभाव में कोई भी कानूनी बहस अधूरी मानी जाएगी।

कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया कि वे रिपोर्ट, संबंधित वीडियो और मुख्य न्यायाधीश की चिट्ठी को रिकॉर्ड में शामिल करेंगे।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा:

“हम जानना चाहते हैं कि जस्टिस वर्मा के घर से जो नकदी बरामद हुई, क्या वह वास्तव में उनकी थी या किसी और की? बिना ठोस जांच और दस्तावेज़ों के, किसी निष्कर्ष पर पहुँचना न्यायोचित नहीं होगा।”

बड़ा सवाल – अगर समिति की रिपोर्ट वैध मानी जाती है और राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को भेजी जाती है, तो यह मामला जज को पद से हटाने की प्रक्रिया के तहत संसद में विचार के लिए जा सकता है। यह भारत के इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण होगा जब किसी उच्च न्यायालय के जज को कथित नकद कांड में पद से हटाने की बात हो।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here