Sunday, August 16, 2026
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Jabalpur CBI Bribery Case: 6 महीने से फरार GST अधीक्षक मुकेश बर्मन ने किया सरेंडर, संपत्ति कुर्की के आदेश के बाद कोर्ट पहुंचा आरोपी

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Jabalpur CBI Bribery Case: जबलपुर। मध्य प्रदेश के चर्चित जबलपुर सेंट्रल जीएसटी रिश्वतकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पिछले करीब 6 महीने से फरार चल रहे जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन ने आखिरकार अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसने कोर्ट का रुख किया। अदालत ने उसे 2 जुलाई तक CBI रिमांड पर भेज दिया है, जहां उससे मामले में गहन पूछताछ की जाएगी।

संपत्ति कुर्की के आदेश के बाद कोर्ट में किया सरेंडर

Jabalpur CBI Bribery Case: CBI के अनुसार, रिश्वतकांड सामने आने के बाद से ही मुकेश बर्मन फरार था। जांच एजेंसी लगातार उसकी तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी कर रही थी, लेकिन वह गिरफ्त से बाहर रहा। करीब छह महीने तक फरार रहने के बाद जब उसके खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू हुई, तब उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।अब CBI रिमांड के दौरान एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।

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16 दिसंबर को CBI ने मारा था छापा

Jabalpur CBI Bribery Case: यह मामला 16 दिसंबर को उस समय सुर्खियों में आया था, जब CBI ने गौरीघाट रोड स्थित सेंट्रल जीएसटी डिविजन ऑफिस में ट्रैप कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा और जीएसटी इंस्पेक्टर सचिन खरे को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।CBI की कार्रवाई की भनक लगते ही जीएसटी अधीक्षक मुकेश बर्मन मौके से फरार हो गया था।

होटल कारोबारी से मांगी गई थी 10 लाख की रिश्वत

Jabalpur CBI Bribery Case: पूरे मामले की शुरुआत होटल व्यवसायी विवेक त्रिपाठी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जीएसटी अधिकारियों ने उनके खिलाफ 1 करोड़ रुपये की रिकवरी का मामला बनाया और उसे निपटाने के बदले 10 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।शिकायत की पुष्टि के बाद CBI ने ट्रैप बिछाया और रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 4 लाख रुपये लेते हुए अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था।

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CBI रिमांड में होंगे कई अहम खुलासे

Jabalpur CBI Bribery Case: अब मुकेश बर्मन के सरेंडर के बाद CBI उससे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि रिश्वत की रकम किसके कहने पर मांगी गई थी, इसमें और कौन-कौन शामिल था तथा पूरे मामले का संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था।जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान इस हाई-प्रोफाइल रिश्वतकांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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