Firecrackers : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : पटाखों पर पूरे देश में नीति बनाने की मांग, दिल्ली-NCR में सालभर बैन जारी

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों (Firecrackers) पर अपना बड़ा आदेश सुनाते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि पूरे देश में एक समान नीति (Uniform Policy) बनाई जाए। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल दिल्ली-NCR तक सीमित प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है, क्योंकि हर नागरिक को प्रदूषण-मुक्त हवा में सांस लेने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने Commission for Air Quality Management (CAQM) और NEERI को यह जांच करने का निर्देश दिया है कि ग्रीन पटाखे (Green Crackers) कितने सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त हैं, और क्या इन्हें सीमित अनुमति दी जा सकती है।
दिल्ली-NCR में पटाखों पर सालभर बैन क्यों?
सुप्रीम कोर्ट का यह ताज़ा आदेश तब आया है जब पहले से ही दिल्ली-NCR में पटाखों पर सालभर प्रतिबंध लागू है।
•3 अप्रैल 2025 को अदालत ने साफ कहा था कि पटाखों के निर्माण, बिक्री, भंडारण और फोड़ने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
•कोर्ट ने यह भी कहा कि जन-स्वास्थ्य का अधिकार किसी भी व्यापारिक या व्यावसायिक हित से कहीं बड़ा है।
दिसंबर 2024: दिल्ली सरकार का स्थायी आदेश
दिल्ली सरकार ने 19 दिसंबर 2024 को राजधानी में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया।
इसमें साफ लिखा गया था कि किसी भी प्रकार के पटाखों का निर्माण, बिक्री, स्टोरेज और उपयोग गैर-कानूनी होगा।
यह आदेश पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत लागू किया गया था।
नवंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
11 नवंबर 2024 को इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने दिल्ली सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बेहद ज़रूरी है।
साथ ही अदालत ने कहा कि “ग्रीन पटाखों” पर वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए ताकि स्पष्ट हो सके कि क्या इन्हें सीमित मात्रा में अनुमति दी जा सकती है।
2017: पटाखों पर पहला बड़ा हस्तक्षेप
पटाखों पर रोक का सिलसिला 2017 से शुरू हुआ था।
•12 सितंबर 2017 – सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर सीमाएँ लगाईं।
•9 अक्टूबर 2017 – दिवाली के दौरान प्रदूषण के खतरे को देखते हुए कोर्ट ने NCR में पटाखों की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया।
पटाखों पर प्रतिबंध का असर
•दिल्ली-NCR में अब पूरे साल पटाखों का इस्तेमाल, निर्माण और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।
•पूरे देश में एक समान नीति लागू होने पर अन्य राज्यों में भी यही नियम लागू हो सकते हैं।
•ग्रीन पटाखों पर वैज्ञानिक रिपोर्ट आने तक उनकी वैधता को लेकर असमंजस बना रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर यह फैसला केवल दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले महीनों में पूरे देश के लिए नई राष्ट्रीय नीति (National Policy on Firecrackers) तैयार हो सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में पटाखों के कारोबार और परंपरागत त्योहारों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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