Bemetra News : बेमेतरा : छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 के उपलक्ष्य में परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत जिला स्तरीय किसान मेला सह संगोष्ठी का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषकों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि एवं आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना रहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विजेंद्र राठी, सदस्य प्रदेश कार्यकारिणी समिति, किसान मोर्चा उपस्थित रहे। उनके साथ सुमन ध्रुव, जनपद सदस्य, मोहन वर्मा, प्रतिनिधि, नीमा वर्मा, जनपद सदस्य, सुशील टंडन, प्रतिनिधि, श्रीमती नीता, जनपद सदस्य, राजू गायकवाड़, मंडल अध्यक्ष, श्री फेरहा राम साहू, सरपंच ग्राम पंचायत ढोलिया सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शामिल हुए।
Bemetra News : कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. श्यामलाल साहू, सहायक संचालक कृषि द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ रजत जयंती की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले की भांति बेमेतरा जिले में भी 17 से 24 अक्टूबर तक रजत महोत्सव अंतर्गत कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मछली पालन तथा अन्य विभागों द्वारा जनजागरूकता कार्यक्रमों और किसान मेलों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने परंपरागत कृषि के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।

Bemetra News : उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों व स्वदेशी ज्ञान के समुचित उपयोग से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए मृदा के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों का ज्ञान जरूरी है जिससे मृदा की उर्वरता एवं स्वास्थ्य को बनाए रखा जा सके। उन्होंने गोबर खाद, नीम खली, हरी खाद, बकरी व पोल्ट्री खाद जैसे प्राकृतिक आदान सामग्री के उपयोग से मृदा में जैविक कार्बन और नत्रजन संतुलन बनाए रखने पर बल दिया।
Bemetra News : इसके पश्चात डॉ. जितेंद्र जोशी ने मृदा एवं जल संरक्षण पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मृदा के सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता कम होती है। उन्होंने कृषकों से अपील की कि पराली को खेतों में न जलाएं, बल्कि बेलर मशीन के माध्यम से बंडल बनाकर पशु चारे के रूप में उपयोग करें। साथ ही उन्होंने हैप्पी सीडर व जीरो टिलेज तकनीक के माध्यम से रबी फसलों की बुआई व फसल अवशेष प्रबंधन के लाभों पर भी प्रकाश डाला। कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा के दौरान वैज्ञानिक (उद्यानिकी) ने उद्यानिकी फसलों, तिलहनी फसलों जैसे अलसी, सरसों आदि की आगामी फसलों की तैयारी एवं चना व मसूर में उकठा रोग के प्रबंधन पर जानकारी दी। उन्होंने कृषकों के कृषि संबंधी तकनीकी प्रश्नों का समाधान भी प्रस्तुत किया।
Bemetra News : कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजेंद्र राठी ने कृषकों को संबोधित करते हुए परंपरागत खेती को अपनाने और राज्य व केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाव में मदद मिलती है।
- Bemetra News : कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं कृषकों ने कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मछली पालन विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉलों एवं प्रदर्शन इकाइयों का अवलोकन किया। इस अवसर पर केवीके एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 500 से अधिक कृषकों की सहभागिता रही, जिन्होंने प्रदर्शनी, तकनीकी सत्र एवं संवाद के माध्यम से पारंपरिक एवं आधुनिक कृषि के समन्वय पर उपयोगी जानकारी प्राप्त की।











