भारत का करारा जवाब : नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान के युद्ध भड़काने वाले बयानों और सिंधु जल समझौते को लेकर तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान की बयानबाजी उनकी पुरानी आदत है और किसी भी दुस्साहस का नतीजा दर्दनाक होगा।
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सिंधु जल समझौते पर भारत का स्पष्ट रुख:
जयसवाल ने कहा कि भारत ने इस तथाकथित कोर्ट की वैधता, अधिकारिता या सक्षमता को कभी स्वीकार नहीं किया। इसके फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह भारत के जल उपयोग के अधिकारों पर असर नहीं डालता। 27 जून 2025 को भारत ने संप्रभु निर्णय के तहत इस संधि को सस्पेंड कर दिया था, यह फैसला पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद के जवाब में लिया गया।
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भारत-अमेरिका संबंध:
विदेश मंत्रालय ने भारत-अमेरिका के गहरे रणनीतिक और रक्षा साझेदारी पर जोर दिया। जयसवाल ने बताया कि अगस्त के मध्य में अमेरिका की डिफेंस पॉलिसी टीम भारत का दौरा करेगी। साथ ही, इस महीने अलास्का में 21वां संयुक्त सैन्य अभ्यास और अंत में 2+2 इंटरनेशनल मीटिंग आयोजित की जाएगी।
अन्य अंतरराष्ट्रीय पहलू:
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प्रधानमंत्री मोदी की UNGA यात्रा पर अभी कोई फैसला नहीं।
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भारत BRICS समूह का सक्रिय सदस्य बना हुआ है।
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भारत-चीन सीमा व्यापार को लिपुलेख, शिपकी ला और नाथु ला दर्रों के माध्यम से फिर से शुरू करने के प्रयास जारी।
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वैकल्पिक मुद्रा और डी-डॉलराइजेशन पर भारत का रुख स्पष्ट।
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जयसवाल का निष्कर्ष:
“पाकिस्तान को सलाह दी जाती है कि वह अपनी बयानबाजी में संयम बरते। भारत का फोकस आपसी सम्मान, साझा हित और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित मजबूत अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को आगे बढ़ाने पर है।”









