Bilaspur Health Camp: गौरी शंकर गुप्ता/बिलासपुर। बिलासपुर के अग्रेय नगर स्थित सुप्रसिद्ध ओंकारेश्वर मंदिर प्रांगण में जन-स्वास्थ्य और लोक-कल्याण को समर्पित एक अनूठे विधिक चिकित्सा अनुष्ठान का सफल समापन हुआ। ग्राम विकास गतिविधि ‘आरोग्य संस्थानम्’ के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय (23 एवं 24 मई 2026) निःशुल्क पंचतत्व चिकित्सा एवं एक्यूपंक्चर चिकित्सा शिविर में बिलासपुर अंचल के सैकड़ों नागरिकों ने हिस्सा लिया। सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे तक अनवरत संचालित इस लोक-कल्याणकारी शिविर में कुल 213 नागरिकों का विधिक पंजीयन कर उन्हें प्राकृतिक व वैकल्पिक माध्यमों से स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया गया। शिविर में बिना किसी रासायनिक औषधि के, शरीर के भीतर मौजूद पंचमहाभूतों के संतुलन पर विशेष विधिक ध्यान केंद्रित किया गया।
क्या है पंचतत्व चिकित्सा? पांच तत्वों के विधिक संतुलन से असाध्य रोगों पर प्रहार
शिविर के मुख्य आकर्षण और चिकित्सा पद्धति के विधिक सिद्धांतों के बारे में जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि मानव शरीर मूल रूप से पांच तत्वों— पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश से मिलकर बना है। इन तत्वों में विधिक असंतुलन ही समस्त शारीरिक और मानसिक व्याधियों का मूल कारण बनता है।
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जटिल रोगों का विधिक उपचार: शिविर के दौरान गत्यसिद्ध चिकित्सक डॉ. धीरेंद्र यादव, विख्यात एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ डॉ. अवंतिका अग्रवाल एवं डॉ. अर्चना अग्रवाल द्वारा मरीजों का गहन विधिक परीक्षण किया गया।
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इन बीमारियों का हुआ शमन: चिकित्सकों की इस विशेषज्ञ टीम ने बिना दवाओं के केवल एक्यूप्रेशर, सुजोक और एक्यूपंक्चर विधिक वेधन के माध्यम से सिरदर्द, गंभीर कंधा दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, जोड़ों का दर्द, स्लिप डिस्क, साइटिका, कोहनी व पंजे के दर्द का मौके पर ही विधिक निवारण किया। इसके अतिरिक्त दीर्घकालिक व जटिल बीमारियां जैसे— त्वचा रोग, मधुमेह (Diabetes), हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड, अनिद्रा (Insomnia), मानसिक अवसाद, लकवा (Paralysis), अस्थमा और महिला जन्य गुप्त रोगों के प्रबंधन हेतु मरीजों को उचित विधिक परामर्श व कस्टमाइज्ड थेरेपी प्रदान की गई।

तुलसी मिलेट्स के संचालक का रहा विधिक मार्गदर्शन; सामाजिक ताने-बाने ने दिखाई एकजुटता
इस वृहद स्वास्थ्य अभियान के सफल क्रियान्वयन के पीछे नगर के प्रबुद्ध जनों और सामाजिक संस्थाओं का एक मजबूत विधिक नेटवर्क सक्रिय रहा।
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प्रेरणा स्रोत: पूरे कार्यक्रम को विधिक प्रेरणा और वैचारिक मार्गदर्शन श्री लक्ष्मीनारायण अग्रवाल (संचालक, तुलसी मिलेट्स) द्वारा प्रदान किया गया, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खान-पान और प्राकृतिक जीवन शैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। सहयोगी के रूप में पंडित सुरेन्द्र मिश्रा जी संपूर्ण विधिक व पारंपरिक व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
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प्रशासनिक व संगठनात्मक टीम: कार्यक्रम के सफल संचालन, विधिक प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क कमान को प्रांत प्रमुख श्री देवेंद्र जी, श्री रोहित भागे, श्री अमित चतुर्वेदी, श्री हिमांचल साहू एवं श्रीमती अंजू सिंह राजपूत ने बखूबी संभाला।
पार्षदों और वार्ड प्रमुखों का अमूल्य योगदान; आयोजकों ने माना आभार
शिविर को पूर्णतः विधिक और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी अहम आहुति दी। आयोजन समिति की ओर से श्री अजीत सिंह भोगल जी, स्थानीय वार्ड पार्षद ध्रुव कोरी, वार्ड अध्यक्ष श्री संजय गुप्ता जी, श्री महेंद्र जैन जी, श्री जय सिंह चंदेल जी, श्री Ajay भट्ट जी, श्री भूपेंद्र गुप्ता जी, श्रीमती निम्मी बनर्जी, श्री श्री नारायण तिवारी जी एवं श्री प्रहलाद दूसेजा जी का विधिक व अमूल्य योगदान दर्ज किया गया।
शिविर के समापन सत्र में ‘आरोग्य संस्थानम्’ के आयोजकों ने बिलासपुर के जागरूक नागरिकों, सेवाभावी चिकित्सकों और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी विधिक सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उपस्थित नागरिकों ने भी इस बात पर प्रसन्नता जताई कि आज के इस रासायनिक युग में ऐसी प्राचीन और विधिक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियां समाज के गरीब वर्ग के लिए एक महान और सस्टेनेबल वरदान साबित हो रही हैं।









