Fake SIM Card Racket : रीवा (विकास बघेल)। साइबर ठगी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रीवा पुलिस ने एक अंतरराज्यीय प्रभाव वाले गिरोह को दबोचा है। समान और सिविल लाइंस पुलिस की संयुक्त टीम ने भोपाल मुख्यालय से मिले खुफिया इनपुट (Intel) के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीन ऐसे जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जो साल 2018 से 2021 के बीच फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड एक्टिवेट कर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे।
भोपाल साइबर सेल की जांच में खुला राज
यह मामला तब प्रकाश में आया जब भोपाल साइबर पुलिस ऑनलाइन ठगी के मामलों की पड़ताल कर रही थी। जांच के दौरान जब संदिग्ध नंबरों के कैफ (Customer Application Form – CAF) की बारीकी से जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गिरोह ने सिम एक्टिवेशन के दौरान ग्राहकों की मूल जानकारी छिपाई और दस्तावेजों पर अपनी ही फोटो को एडिट करके अपलोड कर दिया था।
क्रॉस वेरिफिकेशन से खुली परतें
एडिशनल एसपी आरती सिंह ने बताया कि जब पुलिस ने फॉर्म में दर्ज पते और वहां रहने वाले व्यक्तियों की फोटो का मिलान किया, तो वे मेल नहीं खाए। जालसाजों ने तकनीकी छेड़छाड़ कर सिस्टम को चकमा दिया था। इन सिम कार्ड्स का उपयोग बाद में साइबर ठगों द्वारा बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए किया गया। इस खुलासे के बाद से शहर के अन्य सिम विक्रेताओं में भी हड़कंप मचा हुआ है।
मुनाफे के लिए ‘साइबर क्राइम’ को दिया बढ़ावा
पकड़े गए आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सक्रिय सिम कार्ड्स को शातिर ठगों को मोटी रकम लेकर बेचते थे। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितनी सिम बाजार में खपाई हैं और उनके जरिए कितने लोगों के साथ ठगी की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध सिम विक्रेताओं के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
बाइट: आरती सिंह, एडिशनल एसपी रीवा “भोपाल मुख्यालय से मिले इंटेल के आधार पर हमने संयुक्त दबिश दी। आरोपी वर्ष 2018 से सक्रिय थे और एडिटेड फोटो के जरिए सिम एक्टिवेट कर रहे थे। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।”











