Chhattisgarh RTE Fee Refund : रायपुर, 23 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत एक छात्र के हक की रक्षा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की मौजूदगी में सोमवार को एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल को छात्र की 16,000 रुपये की फीस वापस करनी पड़ी। इतना ही नहीं, आयोग के कड़े रुख के बाद शिक्षा विभाग को विशेष रूप से पोर्टल खोलकर छात्र का नाम निःशुल्क सीट पर दर्ज करना पड़ा।
बहानों के बीच दब गया था मासूम का हक मामला पिछले साल अप्रैल का है, जब एक जरूरतमंद पालक के बच्चे का चयन प्रथम चरण की लॉटरी में हुआ था। स्कूल प्रबंधन ने यह कहकर प्रवेश देने से मना कर दिया कि पालक ने संपर्क नहीं किया, वहीं नोडल अधिकारी ने दलील दी कि पालक ने फोन नहीं उठाया। मजबूरी में पिता ने 16 हजार रुपये कर्ज लेकर उसी स्कूल में सशुल्क प्रवेश दिलाया। 10 महीने बाद जब यह शिकायत आयोग तक पहुंची, तो आयोग ने इन दलीलों को खारिज करते हुए त्वरित सुनवाई की।
आयोग की अध्यक्ष ने स्वयं खड़े होकर वापस कराई राशि आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल फीस वापसी का आदेश दिया, बल्कि शिक्षा विभाग को पोर्टल फिर से खोलने के निर्देश दिए ताकि भविष्य में भी छात्र को निःशुल्क शिक्षा मिलती रहे। आज 23 फरवरी को आयोग की अध्यक्ष के सामने ही स्कूल प्रबंधन ने 16,000 रुपये का अकाउंट पेयी चेक पालक को सौंपा।
अध्यक्ष का कड़ा संदेश इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि बच्चों के संवैधानिक अधिकारों और उनके भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियम स्पष्ट हैं और यदि किसी बच्चे का चयन लॉटरी में हुआ है, तो उसे प्रवेश देना स्कूल और विभाग की जिम्मेदारी है। आयोग की इस कार्यवाही से उन हजारों पालकों में उम्मीद जगी है जो निजी स्कूलों की मनमानी का शिकार होते हैं।










