Friday, August 28, 2026
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Bijapur Fire Accident: ईटपाल के तेंदूपत्ता गोदाम में लगी भयंकर आग; 18 हजार मानक बोरे जलकर खाक, 10 करोड़ का भारी नुकसान

Bijapur Fire Accident: बीजापुर। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिला मुख्यालय के निकटवर्ती ईटपाल क्षेत्र में सोमवार (25 मई 2026) की दोपहर एक निजी तेंदूपत्ता गोदाम में अचानक भीषण और दिल दहला देने वाली आग लग गई। नौतपा की प्रचंड गर्मी, तेज गर्म हवाओं और सूखे वातावरण के कारण आग ने कुछ ही पलों में इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि समूचा गोदाम मलबे और राख के ढेर में तब्दील हो गया। इस दर्दनाक विधिक हादसे में गोदाम के भीतर संग्रहित करके रखे गए लगभग 18 हजार से अधिक तेंदूपत्ता के मानक बोरे पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं। वन विभाग के प्राथमिक विधिक और तकनीकी अनुमान के अनुसार, इस अग्निकांड में सरकार को करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के हरे सोने (तेंदूपत्ता) के विधिक नुकसान का आकलन किया गया है। घटना के बाद से पूरे ईटपाल अंचल में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है।

दोपहर ढाई बजे अचानक भड़की आग; सूझबूझ से बची दर्जनों मजदूरों की जान

वन विभाग और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त आधिकारिक विधिक जानकारी के अनुसार, यह भयानक हादसा सोमवार दोपहर लगभग 2.30 बजे घटित हुआ।

  • भीषण तपन का असर: उस समय क्षेत्र का तापमान अपने चरम पर था और गर्म हवाएं चल रही थीं। गोदाम के भीतर बड़ी मात्रा में सूखा तेंदूपत्ता कस्टमाइज्ड तरीके से जमा किया गया था, जिसने बहुत तेजी से आग को पकड़ा।

  • मजदूरों का रेस्क्यू: राहत की बात यह रही कि जिस वक्त गोदाम के एक हिस्से से लपटें उठनी शुरू हुईं, उस समय अंदर दर्जनों दैनिक वेतनभोगी मजदूर पत्तों की छंटाई और बोरों को व्यवस्थित करने के काम में जुटे हुए थे। धुएं का गुबार और आग की लपटें देखते ही मजदूरों ने सूझबूझ का परिचय दिया और समय रहते गोदाम से बाहर की ओर भाग निकले। इसके चलते इस भीषण विधिक हादसे में किसी भी मानव जीवन की हानि नहीं हुई और सभी श्रमिक पूरी तरह सुरक्षित हैं।

वन विभाग ने किराए पर लिया था गोदाम; 10 दिनों की मेहनत 2 घंटे में राख: डीएफओ रमेश जांगड़े

घटना की विधिक संवेदनशीलता को देखते हुए बीजापुर के जिला वन मंडल अधिकारी (DFO) श्री रमेश जांगड़े अपनी विभागीय तकनीकी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का विधिक मुआयना करने के बाद आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया:

“संबंधित निजी गोदाम को वन विभाग द्वारा चालू सीजन के तेंदूपत्ता संग्रहण और भंडारण के लिए विधिक नियमों के तहत किराए पर लिया गया था। पिछले दस दिनों से बीजापुर के विभिन्न प्राथमिक सोसायटियों से संग्रहित कर लाए जा रहे तेंदूपत्ता को यहां सुरक्षित डंप किया जा रहा था। अब तक विभाग द्वारा करीब 18,000 से अधिक मानक बोरे विधिक रूप से यहां जमा किए जा चुके थे। आग इतनी तेजी से फैली कि सुरक्षा इंतजामों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। प्रारंभिक विधिक वित्तीय मूल्यांकन के आधार पर लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक का तेंदूपत्ता पूरी तरह नष्ट हो चुका है, जो विभाग के लिए एक बड़ी क्षति है।”

घंटों की मशक्कत के बाद भी आग बुझाने की विधिक जंग जारी; जांच के निर्देश

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोदाम से उठने वाले काले धुएं का विशाल गुबार कई किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय से भी साफ दिखाई दे रहा था। आग की विधिक सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और नगर पालिका की फायर ब्रिगेड की गाड़ियां (दमकल वाहन) तत्काल मौके पर भेजी गईं।

आग की भयंकर लपटों और गोदाम के भीतर दबे पत्तों की सुलगती आग को देखते हुए अतिरिक्त दमकल वाहनों को भी तैनात किया गया। खबर लिखे जाने तक, विभागीय अधिकारियों, स्थानीय पुलिस प्रशासन और नगर पालिका की विशेष रेस्क्यू टीमों की मौजूदगी में घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद भी आग पर पूरी तरह विधिक नियंत्रण पाने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी रहे।

शॉर्ट सर्किट या साजिश? विधिक जांच शुरू: स्थानीय पुलिस और वन विभाग की संयुक्त विधिक टीम ने आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है। प्राथमिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि गोदाम के बिजली कनेक्शन में भारी लोड के कारण हुए ‘शॉर्ट सर्किट’ (Short Circuit) की वजह से यह हादसा हुआ होगा, लेकिन वन विभाग इस बिंदु पर भी विधिक जांच कर रहा है कि कहीं इस करोड़ों रुपये के नुकसान के पीछे कोई मानवीय लापरवाही या शरारती तत्वों की कोई छिपी हुई विधिक साजिश तो नहीं थी। गोदाम की विधिक फायर ऑडिट रिपोर्ट भी तलब की गई है।

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