निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : दिल टूटना केवल भावनात्मक तकलीफ नहीं है, बल्कि यह एक वास्तविक स्वास्थ्य समस्या का रूप भी ले सकता है, जिसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कहा जाता है। यह स्थिति अक्सर अचानक मानसिक या शारीरिक तनाव के बाद उत्पन्न होती है, जिसमें दिल की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर पड़ जाती हैं और हृदय सामान्य तरीके से रक्त पंप नहीं कर पाता। कई बार इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे लगते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन जाती है।
क्या होते हैं इसके प्रमुख लक्षण?
इस सिंड्रोम में मरीज को सीने में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी, धड़कन तेज होना, कमजोरी, चक्कर आना, पसीना, मितली या उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि सही समय पर उपचार मिलने पर दिल दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगता है।
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, जिसे चिकित्सकीय भाषा में टैकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है, यह दिल की मांसपेशियों की अस्थायी कमजोरी है। किसी प्रियजन की मृत्यु, रिश्ते में धोखा, नौकरी छूटना या बड़ा जीवन परिवर्तन जैसे भावनात्मक झटके इसे ट्रिगर कर सकते हैं।
इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव, अत्यधिक तनाव और कुछ दवाओं का प्रभाव भी जोखिम बढ़ा सकता है। 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है, क्योंकि तनाव हॉर्मोन का स्तर बढ़ने से दिल पर दबाव पड़ता है।
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कैसे करें बचाव?
तनाव नियंत्रण इस स्थिति से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। नियमित योग, मेडिटेशन, हल्की एक्सरसाइज, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद दिल और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना भी जरूरी है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर सीने में अचानक दर्द, सांस लेने में कठिनाई, तेज धड़कन, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे संकेतों को हार्ट अटैक जितना ही गंभीर माना जाता है।
भले ही लक्षण हल्के हों लेकिन बार-बार दिखाई दें, तब भी मेडिकल सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और उपचार से दिल को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है और स्वास्थ्य तेजी से सुधर सकता है।











