Sunday, September 27, 2026
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World Thalassemia Day 2026: भारत में क्यों बढ़ रहा थैलेसीमिया का खतरा? हर साल हजारों बच्चे जन्म से ही बन रहे मरीज जाने पूरी खबर…

World Thalassemia Day 2026: हर साल 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस (World Thalassemia Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस गंभीर आनुवांशिक बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय रहते जांच व रोकथाम के लिए प्रेरित करना है। इस साल की थीम “Hidden No More: Finding the Undiagnosed, Supporting the Unseen” रखी गई है, जिसका मतलब है उन लोगों तक पहुंचना जो थैलेसीमिया के कैरियर हैं लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

भारत में थैलेसीमिया लगातार बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार देश में लगभग 3.5 करोड़ से 5 करोड़ लोग β-थैलेसीमिया के वाहक हैं। हर साल हजारों बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। यही कारण है कि भारत को कई बार “थैलेसीमिया की राजधानी” भी कहा जाता है।

World Thalassemia Day 2026:क्या है थैलेसीमिया?

थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रक्त विकार (Genetic Blood Disorder) है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीज को कमजोरी, थकान, एनीमिया और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है। यदि माता और पिता दोनों थैलेसीमिया के कैरियर हों, तो बच्चे में बीमारी होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई लोगों को खुद नहीं पता होता कि वे इस बीमारी के वाहक हैं।

World Thalassemia Day 2026:भारत में क्यों बढ़ रहे मामले?

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में थैलेसीमिया बढ़ने की सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। अधिकांश लोग शादी से पहले थैलेसीमिया स्क्रीनिंग नहीं कराते। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इस बीमारी के बारे में जानकारी बेहद कम है।
कुछ राज्यों और समुदायों में निकट संबंधियों में विवाह की परंपरा भी बीमारी के फैलाव का एक बड़ा कारण मानी जाती है। ऐसे मामलों में आनुवांशिक बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है।

World Thalassemia Day 2026:जिंदगी भर का संघर्ष

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को हर 3 से 4 सप्ताह में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराना पड़ता है। लगातार खून चढ़ाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए अलग उपचार और महंगी दवाइयों की जरूरत पड़ती है।
एक मरीज के इलाज पर हर साल लाखों रुपये तक खर्च हो सकते हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट को इसका संभावित इलाज माना जाता है, लेकिन इसकी लागत इतनी अधिक होती है कि अधिकांश परिवार इसे वहन नहीं कर पाते।

World Thalassemia Day 2026:क्या इस बीमारी को रोका जा सकता है?

विशेषज्ञ कहते हैं कि थैलेसीमिया पूरी तरह रोकथाम योग्य बीमारी है। यदि शादी से पहले दोनों लोगों की स्क्रीनिंग कराई जाए, तो बीमारी के जोखिम का आसानी से पता लगाया जा सकता है। एक साधारण ब्लड टेस्ट यह बता सकता है कि कोई व्यक्ति थैलेसीमिया का कैरियर है या नहीं।
दुनिया के कई देशों में प्री-मैरिटल स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियानों के जरिए थैलेसीमिया के मामलों में बड़ी कमी लाई गई है। भारत में भी यदि स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाए जाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।

World Thalassemia Day 2026:जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थैलेसीमिया को लेकर डर नहीं, बल्कि जानकारी फैलाने की जरूरत है। समय पर जांच, सही सलाह और जागरूकता के जरिए हजारों बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है। एक छोटा-सा ब्लड टेस्ट भविष्य की बड़ी परेशानी को रोक सकता है।

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