Atal Bihari Vajpayee: नई दिल्ली। भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे और भारतीय राजनीति के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर वरिष्ठ भाजपा नेता और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (GSDS) के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने एक बेहद खास कॉफी टेबल बुक लिखी है। ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ नाम की यह किताब केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास और अटल जी के साथ लेखक के बेहद करीबी व व्यक्तिगत रिश्तों का एक जीवंत दस्तावेज है। इस किताब को पूरा करने में विजय गोयल को चार साल का लंबा समय लगा, जिसमें उन्होंने कई दुर्लभ तस्वीरों और भुला दिए गए ऐतिहासिक तथ्यों को संजोया है।![]()
आपातकाल का दौर और “आया करो” का अनमोल किस्सा
विजय गोयल ने एक विशेष बातचीत में भावुक होते हुए बताया कि अटल जी उनके जीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर पर मौजूद रहे, यहाँ तक कि उनकी शादी में बाराती बनकर भी आए थे। उन्होंने याद किया कि आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान जब अटल जी पैरोल पर बाहर आए थे, तब बेहद कम लोग उनसे मिलने की हिम्मत जुटा पाते थे, लेकिन गोयल लगातार उनसे मिलने जाते रहे। जब वाजपेयी जी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने, तब विजय गोयल उनसे मिलने पहुंचे। उस मुलाक़ात को याद करते हुए गोयल कहते हैं, “उनकी आंखों में एक संतोष था जैसे वह कह रहे हों- देखो हम कहाँ पहुँच गए। मैंने उनसे कहा कि सर कोई काम हो तो बताइएगा, तो उन्होंने बेहद सादगी से सिर्फ दो शब्द कहे- ‘आया करो’। उनके इस अपनेपन के बाद उनके घर के दरवाजे मेरे लिए हमेशा खुले रहे।”
मुश्किल दौर में ‘पीपल मैनेजमेंट’ और जयललिता संग बर्फ पिघलने की कहानी
किताब में अटल जी के कुशल राजनीतिक और व्यावहारिक प्रबंधन (पीपल मैनेजमेंट) के कई दिलचस्प किस्से दर्ज हैं। गोयल ने बताया कि एक बार बसपा सुप्रीमो मायावती तत्कालीन पीएम वाजपेयी जी से मिलने आईं और करीब एक घंटे तक अपनी शिकायतें और समस्याएं गिनाती रहीं। अटल जी ने बेहद धैर्यपूर्वक उन्हें सुना और महज पांच वाक्यों में ऐसा सटीक जवाब दिया कि वह पूरी तरह संतुष्ट होकर लौटीं।
इसके अलावा गठबंधन सरकार की मजबूरियों को संभालने का एक और दिलचस्प वाकया साझा करते हुए गोयल ने बताया कि जब जे. जयललिता ने सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी थी, तब उनके ही घर पर एक अहम बैठक हुई थी। बैठक की शुरुआत में जब दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच चुप्पी पसरी थी, तब विजय गोयल ने माहौल को हल्का करने के लिए मजाक में कहा कि “जयललिता जी अच्छा खाना बना सकती हैं और अटल जी अच्छी कविताएं लिख सकते हैं।” इस एक टिप्पणी ने जमी हुई बर्फ को पिघला दिया और दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला दोबारा शुरू हो गया।
दूरदर्शी सोच और विरोधियों के बीच सामंजस्य की कला
विजय गोयल के अनुसार, अटल जी बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के मामले में अपने समय से बहुत आगे थे। उन्होंने उस दौर में सड़कों, डिजिटल हाईवे और स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की बात की थी, जिसके लिए तब उनकी आलोचना भी हुई थी, लेकिन आज देश उसी विकास की राह पर है। गोयल का मानना है कि यदि अटल जी आज के दौर में होते, तो सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कहीं अधिक सद्भाव और आपसी तालमेल देखने को मिलता। वह फिल्मों और कवि सम्मेलनों के शौकीन, बेहद जिंदादिल और गंभीर से गंभीर परिस्थितियों में भी शांत रहने वाले एक सच्चे ‘स्टेट्समैन’ थे। यह किताब पाठकों को एक राजनेता के पीछे छिपे उस सहृदय, मजाकिया और बेहद संवेदनशील इंसान से रूबरू कराती है, जिसने अपनी कूटनीति से देश को आगे बढ़ाया।









