Fuel Price Hike: नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल (फ्यूल) की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण जहां हर आम और खास चीज महंगी होती जा रही है, वहीं अब ऑनलाइन खाना और ग्रॉसरी मंगाने वाले उपभोक्ताओं की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हाल ही में आई एलारा कैपिटल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में हो रहे इजाफे से Zomato (Eternal) और Swiggy जैसे दिग्गज फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर आने वाले समय में ऑपरेशनल कॉस्ट (परिचालन लागत) का दबाव काफी बढ़ सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फिलहाल कंपनियों के लिए यह स्थिति नियंत्रण में यानी मैनेजेबल रहने की उम्मीद है।
जियोपॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल का असर
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव (जियोपॉलिटिकल टेंशन) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच हाल ही में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 4 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह सीधा 4 फीसदी का उछाल है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर डिलीवरी बिजनेस से जुड़े अर्थशास्त्र पर पड़ रहा है। माना जा रहा है कि ईंधन महंगा होने की वजह से डिलीवरी से जुड़े गिग वर्कर्स (डिलीवरी पार्टनर्स) भी कंपनियों से ज्यादा भुगतान या इंसेंटिव की मांग कर सकते हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा।
किस ऐप पर कितना आता है प्रति ऑर्डर डिलीवरी खर्च?
एलारा कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स के डिलीवरी खर्च का एक विस्तृत ब्यौरा साझा किया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि देश में क्विक कॉमर्स (जैसे ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट) के लिए औसतन डिलीवरी कॉस्ट लगभग 35 से 50 रुपये प्रति ऑर्डर बैठती है, जबकि पारंपरिक फूड डिलीवरी के लिए यह खर्च 55 से 60 रुपये प्रति ऑर्डर तक जाता है। यदि दोनों को मिलाजुला कर (ब्लेंडेड बेसिस) देखा जाए, तो Zomato (Eternal) के लिए एवरेज डिलीवरी कॉस्ट लगभग 45 रुपये प्रति ऑर्डर और स्विगी के लिए लगभग 55 रुपये प्रति ऑर्डर होने का अनुमान है।
हर ऑर्डर पर कितना बढ़ जाएगा वित्तीय बोझ?
आमतौर पर किसी भी फूड या क्विक डिलीवरी कॉस्ट में अकेले फ्यूल (ईंधन) की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी होती है। इस गणित के हिसाब से हर एक ऑर्डर पर फ्यूल कॉस्ट लगभग 9 से 10 रुपये बैठती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया 4 फीसदी की बढ़ोतरी से हर एक ऑर्डर पर करीब 0.44 रुपये (44 पैसे) का नकारात्मक असर पड़ेगा। कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को पूरी तरह खुद उठाने के बजाय इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर ‘कस्टमर चार्ज’ या ‘डिलीवरी फीस’ बढ़ाकर डाल सकती हैं।
सबसे खराब स्थिति में क्या होगा असर?
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि आने वाले 3 से 6 महीनों में स्थितियां और खराब होती हैं और फ्यूल की कीमतें मौजूदा 4 रुपये से बढ़कर ₹10 प्रति लीटर तक पहुंच जाती हैं, तो प्रति ऑर्डर नुकसान बढ़कर 1 से 1.2 रुपये तक हो सकता है। ऐसी स्थिति में, यदि कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च को ग्राहकों पर नहीं डालती हैं, तो वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में जोमैटो (Eternal) के एडजस्टेड एबिटडा (EBITDA) मुनाफे में 4 से 5 फीसदी और स्विगी के मुनाफे में 10 से 12 फीसदी तक की बड़ी गिरावट आ सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्विगी के मुकाबले जोमैटो इस दबाव को झेलने में ज्यादा मजबूत स्थिति में है।









