CG Viral: 75 दिन का दशहरा! लड़कियां मनमर्जी से चुनती हैं साथी, छत्तीसगढ़ की आदिवासी परंपराएं कर देंगी आपको हैरान

छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ छत्तीसगढ़ आदिवासी परंपराएं और अनोखी जनजातीय संस्कृति के लिए भी देशभर में पहचाना जाता है। राज्य की लगभग 30 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदाय से जुड़ी हुई है। खासतौर पर बस्तर और सरगुजा संभाग में रहने वाली जनजातियों की परंपराएं आज भी लोगों के लिए रहस्य और आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

देशभर में जहां दशहरा रावण दहन के साथ समाप्त हो जाता है, वहीं बस्तर दशहरा परंपरा पूरे 75 दिनों तक चलती है। यह पर्व सावन महीने की हरियाली अमावस्या से शुरू होता है। यहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि विशाल लकड़ी का रथ तैयार किया जाता है और मुरिया दरबार लगाया जाता है, जहां लोगों की समस्याएं सुनी जाती हैं।

घोटुल प्रथा में युवा चुनते हैं अपना जीवनसाथी
घोटुल आदिवासी प्रथा बस्तर की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक मानी जाती है। गांव के बाहर बने विशेष स्थान को घोटुल कहा जाता है, जहां युवक और युवतियां एक-दूसरे को समझते हैं और अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनते हैं। यह परंपरा आदिवासी समाज की सामाजिक स्वतंत्रता को दर्शाती है।
The Ghotul (Muria 3) | -------------------------------------… | Flickrपैठू प्रथा: शादी से पहले साथ रहने की अनुमति
बस्तर की जनजातियों में पैठू विवाह परंपरा भी काफी अनोखी मानी जाती है। इस परंपरा के तहत लड़की शादी से पहले अपनी पसंद के लड़के के घर जाकर रह सकती है। यदि दोनों परिवार सहमत होते हैं, तो बाद में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह कराया जाता है।
Ghotul: The Muria Youth Commune Where Love, Learning, and Freedom Coexistयहां दहेज नहीं, लड़का देता है ‘महला’
जहां देश के कई हिस्सों में दहेज प्रथा समस्या बनी हुई है, वहीं आदिवासी दहेज परंपरा बिल्कुल अलग है। बस्तर की कुछ जनजातियों में शादी के समय लड़का पक्ष लड़की पक्ष को ‘महला’ देता है। इसमें पैसा, पशु या महुआ शराब तक शामिल हो सकती है।

Chhattisgarh Ghotul system of marriage tribal tradition Bastar ann | Chhattisgarh: बस्तर में अनोखी आदिवासी परंपरा, इस तरह युवक-युवतियां चुनते हैं लाइफ पार्टनर, फिर होती है शादीमृतकों की याद में बनाए जाते हैं पत्थर के स्तंभ
दक्षिण बस्तर में गुड़ी परंपरा के तहत मृतकों की याद में बड़े पत्थर के स्तंभ लगाए जाते हैं। माना जाता है कि यह मृत व्यक्ति की स्मृति और सम्मान का प्रतीक होता है। इन पत्थरों को दूर पहाड़ियों से गांव वाले मिलकर लाते हैं।

Ignored & unknown, memory pillars of Bastar tribes symbolize tribal ways | Raipur News - Times of India

कुम्हड़े की बलि से होती है गुप्त पूजा
दंतेवाड़ा क्षेत्र में बस्तर गुप्त पूजा परंपरा बेहद खास मानी जाती है। यहां नवरात्रि के दौरान आधी रात में गुप्त पूजा होती है, जिसमें पशु बलि के स्थान पर कुम्हड़े की प्रतीकात्मक बलि दी जाती है। यह पूजा सीमित लोगों की मौजूदगी में संपन्न होती है।
School With A Difference Giving Wings To Dreams Of Adivasi Children - The Indian Tribalसमाज मिलकर करता है बच्चों की परवरिश
बैगा जनजाति में आदिवासी सामुदायिक जीवन की अनोखी मिसाल देखने को मिलती है। यदि माता-पिता अलग हो जाएं और बच्चे की जिम्मेदारी न लें, तो पूरा समाज मिलकर बच्चे की परवरिश करता है। समुदाय एक अभिभावक नियुक्त करता है जो बच्चे की देखभाल करता है।

सवाल-जवाब में ढूंढे अपने उत्तर

Q1. बस्तर दशहरा कितने दिन तक चलता है?
बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक मनाया जाता है।

Q2. घोटुल प्रथा क्या है?
घोटुल आदिवासी युवाओं के लिए बना सामाजिक स्थान है, जहां वे अपना जीवनसाथी चुनते हैं।

Q3. पैठू परंपरा क्या है?
इस प्रथा में लड़की शादी से पहले लड़के के घर जाकर रह सकती है।

Q4. क्या आदिवासी समाज में दहेज लिया जाता है?
कुछ जनजातियों में दहेज की जगह लड़का पक्ष ‘महला’ देता है।

Q5. बस्तर की सबसे अनोखी परंपरा कौन सी मानी जाती है?
75 दिन तक चलने वाला बस्तर दशहरा सबसे अनोखी परंपराओं में शामिल है।

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