निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान तेज हो गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजनीतिक रणनीति तैयार करने वाली फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर की गई।
रेड के दौरान ममता बनर्जी की मौजूदगी ने बढ़ाया विवाद
ईडी की कार्रवाई के दौरान हालात उस समय असाधारण हो गए, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया। कोलकाता में इस घटनाक्रम के बाद I-PAC एक बार फिर सुर्खियों में आ गई और यह सवाल उठने लगे कि आखिर I-PAC और तृणमूल कांग्रेस के बीच रिश्ता कितना गहरा है।
क्या है I-PAC और राजनीति में इसकी भूमिका
I-PAC एक बड़ी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति, जमीनी सर्वे और कैंपेन मैनेजमेंट का काम करती है। इसकी स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी। साल 2014 से यह संगठन कई राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए काम कर चुका है।
TMC से I-PAC का पुराना जुड़ाव
I-PAC पिछले करीब एक दशक से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी हुई है। पार्टी के लिए जमीनी फीडबैक, प्रशासनिक तालमेल और चुनावी प्लानिंग में इसकी भूमिका अहम मानी जाती है। चुनाव से पहले उम्मीदवार चयन और क्षेत्रीय समीक्षा में भी I-PAC की रिपोर्ट्स को काफी महत्व दिया जाता है।
कौन हैं I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन
प्रतीक जैन मूल रूप से पटना के रहने वाले हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। I-PAC से पहले वह Deloitte India में एनालिस्ट रह चुके हैं। कम प्रोफाइल में रहने वाले प्रतीक जैन को राज्य की राजनीति और प्रशासन में प्रभावशाली नेटवर्क वाला माना जाता है।
ईडी की जांच का आधार क्या है
ईडी कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले से जुड़े कुछ फंड्स 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान TMC के प्रचार में इस्तेमाल हुए। उस चुनाव में TMC के लिए कैंपेन मैनेजमेंट I-PAC ने ही संभाला था। इसी कड़ी में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
राजनीतिक संदेश या जांच में दखल?
विशेषज्ञों के अनुसार, जांच के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना केंद्र और राज्य के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और गरमाहट ला सकता है।









