Sunday, September 20, 2026
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Supreme Court : एक्सप्रेस-वे पर आवारा पशुओं की ‘No Entry’! लापरवाही पर अधिकारी होंगे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार : सुप्रीम कोर्ट

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Supreme Court : नई दिल्ली। देश भर की सड़कों पर आवारा पशुओं और आवारा कुत्तों से होने वाले हादसों और खतरों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने हाइवे और एक्सप्रेस-वे पर आवारा पशुओं की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है और उन्हें तुरंत हटाने का निर्देश दिया है।

Supreme Court : कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश के अनुपालन में किसी भी तरह की ढिलाई बरती गई, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

हाइवे और एक्सप्रेस-वे पर चला ‘सफाई अभियान’

सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देशों की पुन:पुष्टि करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि:

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  • संयुक्त समन्वित अभियान चलाकर राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और एक्सप्रेसवे पर पाए जाने वाले सभी आवारा पशुओं (मवेशियों सहित) को तुरंत हटाया जाए।
  • हटाए गए पशुओं को सभी आवश्यक देखभाल प्रदान की जाए।

सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। अनुपालन की स्थिति रिपोर्ट 8 सप्ताह में प्रस्तुत की जानी है।

कुत्तों के काटने की घटनाओं पर कड़ा रुख: सरकारी संस्थानों की बाड़बंदी अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर भी गंभीर रुख अपनाया है और संस्थागत क्षेत्रों के लिए निम्नलिखित तीन-सूत्रीय निर्देश दिए हैं:

  1. बाड़बंदी और सुरक्षा : सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश दो सप्ताह के भीतर जिला अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, रेलवे स्टेशनों सहित सभी सरकारी संस्थानों की पहचान करें। इन परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यकतानुसार पर्याप्त बाड़ लगाकर सुरक्षित किया जाए। यह कार्य 8 सप्ताह के भीतर पूरा करना होगा।
  2. नोडल अधिकारी की ज़िम्मेदारी : संस्थानों के प्रबंधन को क्षेत्र के रखरखाव के लिए जिम्मेदार नोडल अधिकारी को निर्दिष्ट करना होगा।
  3. हटाने और नसबंदी का नियम:
    • स्थानीय नगरपालिका प्राधिकरण नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे परिसरों में कोई आवारा कुत्ता निवास न करे।
    • प्रत्येक आवारा कुत्ते को ऐसे परिसरों से तुरंत हटाकर नसबंदी के बाद आश्रय स्थल में स्थानांतरित किया जाए।
    • कोर्ट ने साफ कहा कि आवारा कुत्ते को उसी क्षेत्र में वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहाँ से उसे उठाया गया है, क्योंकि ऐसा करने से आदेश का उद्देश्य विफल हो जाएगा।

यह आदेश सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है, लेकिन इसका सफल क्रियान्वयन राज्य सरकारों की तत्परता पर निर्भर करेगा।

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